जागरण संवाददाता, पुरी : आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन रविवार को महाप्रभु जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा आरंभ होगी। भगवान जगन्नाथ जहां अपने नंदिघोष रथ पर सवार होंगे, वहीं देवी सुभद्रा देवदलन रथ पर और बलभद्र तालध्वज रथ पर सवार होकर गुण्डिचा यात्रा पर निकलेंगे। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।

इससे पूर्व आषाढ़ महीने के प्रतिपदा तिथि पर शनिवार को चतुर्धा मुर्तियों का नव यौवन दर्शन शातिपूर्ण संपन्न हो गया। मान्यता के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा पर स्नान वेदी पर 108 घड़ा जल से स्नान कर महाप्रभु 14 दिन के लिए बुखार से पीड़ित थे। इसके बाद शनिवार को महाप्रभु ने दर्शन दिए। सुबह कई नीतियों का पालन करने के बाद मंगल आरती और पारिमाणिक दर्शन का कार्यक्रम संपन्न हुआ इसके बाद सर्वसाधारण दर्शन संपन्न हुआ। इस मौके पर श्रीमंदिर के चारों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। महाप्रभु के नव यौवन दर्शन के लिए भक्तगण मंदिर के दक्षिण द्वार पर लंबी कतार में खड़े थे। शाति बनाए रखने के लिए मंदिर के अंदर व बाहर चारों तरफ सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे।

इस बीच रविवार को होने वाले रथ यात्रा के लिए श्रीक्षेत्र भक्तों से भर गया। द्वितीया तिथि में चतुर्धा मूर्ति श्रीमंदिर से निकलकर बड़दाड में आएंगी। महाप्रभु भारी जनसैलाब के बीच गुण्डिचा मंदिर की यात्रा करेंगे। शनिवार को महाप्रभु के नवयौवन दर्शन संपन्न होने के बाद रथखला से तालध्वज, देवदलन और नंदिघोष को मंदिर के सामने सिंहद्वार पर लाया गया। जहां तीनों रथ अब महाप्रभु जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र के सवार होने का इंतजार कर रहे हैं।

वहीं रविवार को होने वाली यात्रा के मद्देनजर श्रीक्षेत्र के आसपास सुरक्षा के समुचित प्रबंध किए गए हैं। यात्रा में शामिल होने के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा है। यात्रियों की सुरक्षा का खास ध्यान रखा जा रहा है। तालबणिया में अस्थाई बस स्टैंड बनाया गया है। समुद्र में स्नान करते समय यात्रियों की सुविधा के लिए 100 लाइफ गार्ड तैनात किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से 10 लाख लोगों के स्वागत का इंतजाम किया गया है।