जागरण संवाददाता, पुरी : महाप्रभु श्री जगन्नाथ, प्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा और श्री सुदर्शन जी की स्नान यात्रा शुक्रवार को श्रीक्षेत्र में संपन्न हो गई। इसके बाद रीति नीति की गई। इसके बाद महाप्रभु श्री जगन्नाथ, प्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा व श्री सुदर्शन भगवान अणसर पिण्डी को चले गए।

अब 15 दिन महाप्रभु अणवसर (बुखार) में रहेंगे। उसके बाद नव यौवन दर्शन होगा और महाप्रभु श्री रथ पर विराजमान होकर गुण्डिचा मंदिर जाएंगे। आज के बाद श्रीमंदिर में महाप्रभु का दर्शन नहीं मिलेगा। 15 दिन भक्त ब्रह्मंागिरी जाकर अलारनाथ देव का दर्शन करेंगे। अलारनाथ देव का दर्शन करने से महाप्रभु के दर्शन का फल मिलता है।

तीखी धूप से श्रद्धालुओं की संख्या रही। श्रीमंदिर के अन्दर 49 प्लाटून पुलिस फोर्स तैनात की गई थी लेकिन दर्शनार्थी कम आए। वहींदूसरी तरफ महाप्रभु की नीति में भी काफी देरी हुई। सुबह सात बजे पहंडी विजे शुरू हुआ जो कि 8:40 बजे खत्म हुआ। 8:40 बजे महाप्रभु को स्नान मंडप में ले जाया गया। 11:20 बजे मंगल आरती हुई। इसके बाद मइलम, तड़पलागी, अवकाश नीति खत्म कर महाप्रभु का वेश किया गया। धाड़ी पकंडी में पहले श्री सुदर्शन, इसके बाद बलभद्र, देवी सुभद्रा और अन्त में श्री जगन्नाथ स्नान वेदी में विराजमान हुए। दोपहर 2:30 बजे महाप्रभु की जल विजे की गई। श्री जगन्नाथ जी को 35 घड़े, बलभद्र जी को 32 घड़े, सुभद्रा देवी को 22 घड़े और सुदर्शन जी को 18 घड़े जल से स्नान करवाया गया। पहले मुदीरस्त और सोना गोसांई जल लागी किए। इसके बाद पूजा पंडा सेवकों ने श्री विग्रहों के ऊपर जल लागी की। गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव ने स्नान मंडप के ऊपर तीनों महाप्रभु की आरती की और छेरा पहंरा किए। इससे पहले मइलम, मेकाप सर्वांग और वेश संपन्न हुआ। छेरा पहंरा के बाद चतुर्धा मूर्तियों को सज्जिात किया गया मनोरम गजानन वेश में। राघव दास मठ और गोपाल तीर्थ मठ से हाथी वेश का सभी व्यवस्था फुल की टोपी लायी गई। गजानन वेश के बाद सहाण मेला दर्शन आरंभ हुआ। देर रात में महाप्रभु को बाहुड़ा पहंडी किया गया। इस पहंडी को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।