जागरण संवाददाता, पुरी : पवित्र अक्षय तृतीय के मौके पर श्रीजीओं की प्रसिद्ध चंदनयात्रा का शुभारंभ होने के साथ रथयात्रा के लिए तीनों रथ के निर्माण कार्य अनुकूल किया गया है। श्रीमंदिर में द्वादश यात्रा बंदापना के बाद चंदन महाप्रभु पालकी में विराजमान किए। श्रीजीओं की चलंति प्रतिमा मदन मोहन, महालक्ष्मी और सरस्वती साथ में मणि विमान में विराजमान किए थे और रामकृष्ण पालकी में विराजमान किए थे। पूर्व नीति नियम के दो घंटे की देरी से अपराह्न 5 बजे मदन मोहन, लक्ष्मी सरस्वती, रामकृष्ण श्रीक्षेद्द के प्रमुख पंचु महादेव श्री लोकनाथ, जमेश्वर, कपालमोचन, मार्केण्डेश्वर और नीलकण्ठेश्वर के साथ शोभायात्रा में नरेन्द्र सरोवर पहुुंचे, जहां वहां चंदन चकड़ा में महाप्रभु की चंदन यात्रा सपन्न हुई। विधि के अनुसार दिन रात दो बार महाप्रभु नाव में बैठकर चंदन तालाब में विचरण करेगे। यह यात्रा 21 जून तक चलेगी। शाम को महाप्रभु से आज्ञामाल मिलने के बाद श्रीनअर के सामने तीनों रथ निर्माण कार्य का अनुकूल किया गया। 14 सूत्री ब्राह्मण आचार्य के रूप में वनयाग विधि सपन्न किए। श्रीमंदिर के पुरोहित तीनों रथ के लिए 3 लकड़ी के ऊपर मंत्र के साथ जल छिड़कने के साथ फूल और चंदन लगाकर तीनों रथ के विश्वकर्मा को नारियल और सुपारी प्रदान किए थे। तीनों मुख्य महारणा के सिर में साड़ी बांधी गई थी। श्रीमंदिर के पुरोहित सोने की कुल्हाड़ी से छू कर रथ निर्माण का शुभ अनुकूल किए थे। इसके बाद विश्वकर्माओं द्वारा लोहे की कुल्हाड़ी से तीनों रथ का निर्माण कार्य शुरू हुआ। रथ अनुकूल के अवसर पर श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक डा.अरविन्द कुमार पाढ़ी, जिलाधीश धीरेन कुमार पटनायक, अतिरिक्त एस.पी और श्रीमंदिर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।