जगन्नाथ धाम, पुरी : मानसून की बारिश में भीगने से भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ गए हैं। अब भक्तों को 15 दिन तक उनका दर्शन नहीं होगा। बीमार महाप्रभु को आयुर्वेदिक दवा का भोग लगाकर उनका इलाज किया जा रहा है। 8 जुलाई को भगवान के स्वस्थ होने पर उन्हें 10 जुलाई को रथ पर बैठा कर आठ दिन तक विश्राम के लिए मौसी के घर ले जाया जाएगा। भगवान की अपने धाम से मौसी के घर तक की इसी यात्रा को रथ यात्रा कहा जाता है।

देश के प्राचीन चार धाम में से एक पुरी के भगवान जगन्नाथ की हिंदू समाज में काफी मान्यता है। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को महास्नान के बाद जुलाई में होने वाला भगवान जगन्नाथ का रथ यात्रा उत्सव पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। जगन्नाथ मंदिर के पुजारी विनायक दास महापात्र ने बताया कि भीषण गर्मी के बाद बारिश होने के कारण भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर स्नान मंडप में आते हैं। स्नान पूर्णिमा के अवसर पर स्नान मंडप में वर्ष में सिर्फ एक बार तीनों प्रतिमाओं को एक सौ आठ कलश के जल से नहलाया जाता है। इसके बाद उन्हें वर्ष में सिर्फ एक बार हाथी के वेश में सजाया जाता है। हाथी वेश में बारिश में भीगने के साथ-साथ भगवान बारिश का मजा लेते हैं। इसी कारण वे बीमार पड़ जाते हैं।

रविवार रात 11 बजे तक लाखों श्रद्धालुओं ने पुरी में आतंकी हमले की आशंका को देखते हुए तैनात पुलिस बल की देखरेख में स्नान पूर्णिमा पर भगवान का दर्शन किया। 15 दिन तक दर्शन बंद हो जाने के कारण दर्शन के इच्छुक श्रद्धालु स्नान दर्शन के लिए पुरी आते हैं। रविवार को स्नान पूर्णिमा के दिन करीब चार-पाच लाख श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं।

पुरी के एसपी अनूप कुमार साहू ने बताया कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, कहीं किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। सोमवार से ब्रह्मगिरी के अलारनाथ मंदिर में भगवान का दर्शन शुरू हो गया है। इसी कारण अब वहां सुरक्षा का ज्यादा बंदोबस्त किया गया है।

स्नान पूर्णिमा में गजा नन वेश में ज्यादा सनन कर भगवान स्वयं बीमार पड कर यह सन्देश देते है की गर्मी के बाद वारिश में नहीं भीगना चाहिए . क्योकि भगवन भी इससे नहीं बच पाते है .

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