अनुगुल, जागरण संवाददाता। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बुधवार को खोरधा कलेक्टर को टांगी प्रखंड के सहडाघई गांव में अवैध पत्थर खनन मामले में निरीक्षण करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कलेक्टर को चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।

ट्रिब्यूनल ने दिलीप कुमार सामंतराय की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। दिलीप कुमार सामंतराय ने आरोप लगाया है कि एक पतितपाबन बारिक अवैध रूप से सहडाघई में एक खदान से लेटराइट पत्थरों का खनन कर रहा है।

आरोपों के मुताबिक बारिक को एक खास जगह पर खनन की इजाजत थी। हालांकि, इस प्रक्रिया में उसने 20 स्थानों पर खनन किया और टनों लेटराइट पत्थरों का गैर कानूनी तरीके से खनन कर इस प्राकृतिक संसाधन का अत्यधिक दोहन किया है। इस संबंध में बारिक के खिलाफ पहले थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे शिकायतकर्ता को एनजीटी का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

अपने जांच में, एनजीटी ने पाया कि 11 मई, 2022 को 6.32 एकड़ क्षेत्र में लेटराइट स्टोन खदान के लिए पतितपाबन बारिक के पक्ष में पर्यावरण मंजूरी स्थानांतरित की गई थी। लेकिन बारिक ने उस तारीख से पहले खनन शुरू कर दिया था। 9 मार्च, 2022 को जारी किया गया वाई फॉर्म उसके द्वारा अवैध खनन किए जाने की पुष्टि करता है।

इसके बाद एनजीटी ने आदेश में कहा कि "मूल आवेदन में लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए, हम कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट, खोरधा को निर्देशित करते हैं कि वे चार सप्ताह के भीतर साइट का निरीक्षण करें और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उनकी समिति के सदस्यों यानी निरीक्षण दल में मंडल वन अधिकारी, खोरधा या उनके वरिष्ठ प्रतिनिधि के साथ-साथ खान और भूविज्ञान, खोरधा के निदेशक या उनके वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

समिति एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और यदि समिति को लगता है कि लगाए गए आरोप सही हैं, अवैध खनन कथित रूप से किया जा रहा है, तो जिला कलेक्टर तत्काल कदम उठाएंगे। वे इस तरह के अवैध खनन को रोकने के लिए उचित आदेश पारित करेंगे और इस संबंध में पर्यावरण मुआवजा भी निर्धारित करेगा।

Edited By: Roma Ragini

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