संसू, झारसुगुड़ा : वेदांता संयंत्र की एशपोंड फटने के कारण प्रभावित हुए कातीकेला गांव के लोगों को तीन साल बाद भी उनका पुनर्वास नहीं किया गया। इस बीच गुरुवार को कातीकेला ग्रामीणों ने कंपनी के गेट के सामने सुबह सात बजे से धरना दिया। उनका कहना है कि जिला प्रशासन वेदांता कंपनी के पांव तले दबी हुई है। जिसके कारण उनकी समस्या का अब तक समाधान नहीं हुआ है। जिलापाल ने इस मुद्दे को लेकर सात अप्रैल को दोनों पक्षों के साथ बैठक की थी। जबकि तीन साल पहले वेदांता का एशपोंड फटने के कारण पूरा कातीकेला गांव इससे प्रभावित हुआ था। गांवों के खेतीहर जमीन तथा पेयजल के सभी स्त्रोत प्रदूषित हो गए थे। तब से अब तक ग्रामीण उक्त प्रदूषण के बीच जीने को विवश है। उस समय निर्णय लिया गया था कि पूरे गांव का दूसरी जगह पुनर्वास कराया जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों को चार चरणों में कंपनी मुआवजा देगी। पहले चरण में उन्हें 25 प्रतिशत मुआवजा दिया गया। जिसके बाद से अब तक मुआवजे की और कोई राशि नहीं मिली। उन्हें उनकी जमीन का रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया था। पहली किस्त में उन्हें मिली राशि समाप्त हो चुकी है। उधर बीजद व भाजपा द्वारा इस आंदोलन में कूद पड़ने के कारण आंदोलनरत ग्रामीणों दो गुटों में बट गए है। दूसरी ओर कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि 15 अप्रैल उक्त मुद्दे पर बैठक कर समाधान निकाला जाएगा। बैठक में खुद कलेक्टर सहित कंपनी के सीईओ और गांव वाले रहेंगे। उधर जिलापाल का आश्वासन मिलने के बाद सुबह सात बजे से शुरू हुआ ग्रामीणों का आंदोलन शाम पांच बजे समाप्त हो गया। जिसके बाद वेदांता का गेट खुलने दिया गया।

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