संसू, झारसुगुड़ा : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए विभिन्न राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। जिले की विभिन्न समस्याओं को मुद्दा बनाकर प्रतिपक्ष ने शासक दल को घेरना शुरू कर दिया है। ग्राम्यांचल के मतदाताओं को विभिन्न माध्यमों से अपनी ओर करने व प्रभावित करने के लिए अंदरूनी राजनीति की जा रही है। राज्य के बड़े ब्लाक के रूप में जिले का लखनपुर ब्लॉक है। क्षेत्रफल व जनसंख्या को देखते हुए राज्य के इस सीमावर्ती ब्लॉक का विभाजन आवश्यक है। प्रशासनिक सुविधा व लोगों को प्रशासन की ओर करने के लिए इस ब्लॉक का विभाजन जरूरी है। इस मांग को लेकर राजनीतिक दलों में भी समर्थन व स्वीकृति है। इस ब्लॉक को तीन ब्लॉक में विभाजित कर सब डिविजन के रूप में घोषित करने की दिशा में राज्य सरकार पीछे हट रही है। राजनीतिक दल जनमत व ब्लॉक वासियों की मानसिकता को ध्यान में रखते हुए इसका समर्थन करते आ रहे हैं। परंतु अब तक किसी भी दल ने इसके लिए प्रयास नहीं किया है। राज्य व केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव डालकर व सौदेबाजी करने में भी राजनीतिक दल विफल हैं। कई बार इस प्रसंग को लेकर लोगों ने आवाज उठाई। खासकर प्रशासनिक उपेक्षा व आंचलिक वैमनस्यता का शिकार होता आ रहा 19 खंड मौजा व छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा के लोगों का प्रसंग सरकार विरोधी अभियान को जन्म देता आ रहा है। इस बार पंचायत चुनाव में स्थानिक मुद्दों के साथ-साथ लखनपुर ब्लॉक का विभाजन भी चुनाव को प्रभावित करेगा। इसी प्रकार, झारसुगुड़ा जिला के दो ब्लॉक लैयकरा व किरमिरा ब्लाक में सबसे अधिक जनजातीय लोग रहते हैं। फिर भी उन्हें उनका हक नहीं मिल पाया है। उनके हक के आधार पर शिड्यूल ब्लॉक की मान्यता के साथ आदिवासी बहुल अंचल की सर्वांगीण उन्नति के लिए आइटीडीए स्थापित करने की मांग आज तक पूरी नहीं की गई। संबंधित दोनों ब्लाक के आदिवासियों को संगठित कर राज्य व केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए गांव से दिल्ली तक इस प्रसंग को पहुंचाने में सिर्फ सम्मिलित आदिवासी समाज सफल हुआ है। गत एक दशक से दोनों ब्लॉक को शिड्यूल ब्लॉक (आदिवासी अधिसूचित ब्लॉक) की मान्यता प्रदान करने के लिए लगातार राज्य सरकार पर दबाव बनाए जाने के बाद राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को विधिवत प्रस्ताव तैयार कर भेजा है। मगर संबंधित प्रस्ताव केंद्र की फाइलों में दब कर रह गई है। इसका फायदा उठा कर राज्य में शासक दल बीजद ने केंद्र सरकार पर सारा दोष डाल दिया है। भाजपा सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है। वहीं आदिवासी संगठन के नेताओं का कहना है कि अब उनकी मांगों को फाइल में दबाकर नहीं रखा जा सकता। अब बाध्य होकर केंद्र सरकार को दोनों ब्लॉकों को शिड्यूल ब्लाक के रुप में घोषित करना होगा।

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