संवादसूत्र, कटक : वकीलों को हमेशा न्यायालय को देवालय समझना चाहिए। यह बात सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र ने पहले मधुसूदन दास स्मारिकी भाषण (लेक्चर) कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही है। न्याय प्रदान व्यवस्था में वकीलों की भूमिका पर एमएस लॉ कॉलेज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मधुसूदन दास एवं गोपबंधु की देशभक्ति ने हमेशा से लोगों को प्रेरित किया है। मधु बाबू का स्वतंत्र ओडिशा गठन में अहम योगदान है, लेकिन स्वतंत्र राज्य की मान्यता एवं स्वाधीन भारत के पल को वह नहीं देख पाए। इससे पहले ही उनका निधन हो गया मगर उनके योगदान को लोग आज भी याद करते हैं। मधुसूदन लॉ कॉलेज के उपस्थित कानून छात्रों से उन्होने कहा कि वकालत के द्वारा समाजहित के लिए काम करो ताकि तुम आगे चलकर यादगार बन जाओ। विश्व के कुछ जाने माने वकीलों की मिसाल देते हुए महात्मा गांधी से लेकर अब्राहम लिंकन तक का उदाहरण रखा। वे किस तरह से अपने मुवक्किल की समस्या सुनते थे और उन्हें हल करते थे, मिसाल दी।

मधुसूदन दास की ¨जदगी पर रोशनी डालते हुए जस्टिस मिश्र ने कहा कि स्वतंत्र ओडिशा गठन में उनका संग्राम यादगार है। एक ओड़िया के तौर पर वह गर्व महसूस करते थे। ओडिशा का उन्हें भीष्म पितामह भी कहा जा सकता है।

सम्मानित अतिथि ओडिशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएस जावेरी ने मधु बाबू को ओडिशा का जननायक एवं शताब्दी नायक बताया। इससे पूर्व उत्कल विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. सौमेन्द्र मोहन पटनायक ने विषय प्रवेश कराया। अंत में एमएस लॉ कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. सुकांत कुमार नंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में जस्टिस दीपक मिश्र एवं के एस जावेरी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ओडिशा हाईकोर्ट के तमाम न्यायाधीश, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, वकील एवं मधुसूदन ला कॉलेज के छात्र-छात्रा उपस्थित थे।

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