संसू, भुवनेश्वर : इंडियन चैंबर ऑफ कामर्स द्वारा आयोजित औद्योगिक कचरे को लेकर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें राज्य में हर साल औद्योगिक कचरे की बढती तादात को लेकर चिंता जतायी गई। बताया गया कि हर साल 50 मिलियन टन औद्योगिक कचरा उत्पन्न हो रहा है। अब समय आ गया है कि इस कचरे के निपटान को लेकर गंभीरता से विचार किया जाए। निकलने वाले औद्योगिक कचरे में से सबसे अधिक मात्रा फ्लाई ऐश की है। मगर संतोष की बात है कि फ्लाई ऐश के कचरे का 83 फीसद ईट बनाने सहित अन्य काम में लिया जा रहा है। औद्योगिक ईकाइयों को इस कचरा प्रबंधन को लेकर चिंतन करने की आवश्यकता है। कोयला से चलने वाले उद्योगों में सबसे अधिक फ्लाई ऐश जैसे औद्योगिक कचरे के लिए जिम्मेदार हैं। राज्य के उद्योग मंत्री दिव्य शंकर मिश्र ने कहा कि राज्य की औद्योगिक ईकाइयों को कचरे के निपटान के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाने और उसी के आधार से काम करने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि औद्योगिक कचरे के अलावा घरों से निकलने वाला कचरा भी हमारे लिए समस्या बना हुआ है। उन्होंने कचरा प्रबंधन के लिए सभी से सहयोग करने की अपील करते हुए राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

Posted By: Jagran

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