संवाद सूत्र, कटक : हाईकोर्ट में श्रीमंदिर जगमोहन मरम्मत मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान श्रीमंदिर प्रशासन एवं आíकलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआइ) की तरफ से हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया। जिसमें श्रीमंदिर प्रशासन ने आगामी चार अप्रैल से पुरी श्रीमंदिर रत्नभंडार की जांच करने के संदर्भ में जानकारी दी है। हाईकोर्ट ने मंदिर प्रशासन व सरकार से जगमोहन मरम्मत एवं रत्नभंडार खोलने के बारे में हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया था। मामले की अगली सुनवाई आगामी पांच अप्रैल को होगी।

समाजसेवी अभिषेक दास ने जगमोहन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने जगमोहन मरम्मत कार्य खत्म करने का एएसआइ को निर्देश देते हुए इसमें हर संभव मदद करने के लिए श्रीमंदिर प्रशासन एवं राज्य सरकार को निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने जगमोहन मरम्मत कार्य खत्म होने पर जगह खाली कर आम श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए मौका देने के समय के बारे में भी अवगत कराने का एएसआइ एवं मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया था। इसके बाद एएसआइ ने मरम्मत कार्य खत्म कर श्रीमंदिर प्रशासन को सौंपने के बारे में कोर्ट को अवगत करा दिया। वहीं, श्रीमंदिर प्रशासन ने जगमोहन श्रद्धालुओं के लिए खोलने के लिए कोर्ट को अवगत कराते हुए एएसआइ से एनओसी मांगा था। जिसे हाईकोर्ट ने नकार दिया था। इस मामले में गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने श्रद्धालुओं के लिए जगमोहन खोले जाने के बारे में श्रीमंदिर प्रशासन से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई पांच अप्रैल को होगी।

रत्नभंडार खोलने के लिए छह सप्ताह की मांग नामंजूर :

जगन्नाथ मंदिर के रत्नभंडार में महाप्रभु का कितना जेवर है, किस किस तरह का जेवर हैं, उसकी सूची वर्ष 1926 में तत्कालीन गजपति महाराज ने तैयार की थी, जो कि पुरी जिलाधीश के रिकार्ड रूम में मौजूद है। जब रत्नभंडार में जेवर की जांच होगी तब उस सूची से उनका मिलान कराने के लिए भी श्रीमंदिर प्रशासन ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस मामले में रत्नभंडार खोलने के लिए कम से कम छह सप्ताह का समय मांगा गया था, जिसे गुरुवार को ही सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नकार दिया। इसके बाद कोर्ट ने रत्नभंडार खोलने के बारे में जानकारी मांगी तो श्रीमंदिर प्रशासन ने चार अप्रैल को खोलने की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि रत्नभंडार का मरम्मत कार्य कब और कैसे होगा उसका निर्णय मंदिर प्रशासन को लेना है।

Posted By: Jagran