जेएनएन, कटक : रेवेंशा विश्वविद्यालय, शिक्षा विभाग के हीरक जयंती समारोह गुरुवार को शुरू हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह का उद्घाटन राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने किया। इस मौके पर राज्यपाल ने 150 साल पूरा करने वाले राज्य के इस प्रमुख शिक्षण संस्थान, रेवेंशा के शिक्षा विभाग व उसके गौरवमयी इतिहास को याद किया। राज्यपाल ने कहा कि ओडिशा कला एवं संस्कृति का महान धरोहर है, जोकि जगन्नाथ भूमि के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। आज के दौर में समाज में जिस तरह से नैतिकता की कमी दिखाई दे रही है, ऐसे में प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था पर राज्यपाल ने सबका ध्यान आकर्षित किया।

राज्यपाल ने कहा कि समय के साथ शिक्षा में काफी बदलाव आया है और आगे भी बदलाव आएगा। विज्ञान के क्षेत्र में मानव समाज ने कई उपलब्धियां हासिल की है लेकिन जो प्रकृति है और जिसका निर्माण स्वयं भगवान ने किया है उसे विज्ञान किसी भी तरह से बदल नहीं सकता है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य विकास की दिशा में अग्रसर है और प्राकृतिक संपदा से भरपूर है।

मुख्य वक्ता नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. संतोष पंडा ने रेवेंशा के इतिहास एवं देश में आई शिक्षा व्यवस्था के बदलाव के संबंध में विस्तार से प्रकाश डाला। रेवेंशा शिक्षा विभाग एलुमिनी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. यूधिष्ठिर खटुआ ने विभाग के 75 साल के इतिहास की जानकारी दी।

इस मौके पर राज्यपाल ने रेवेंशा प्रज्ञा एवं राष्ट्रीय सेमिनार से संबंधित पुस्तक का विमोचन किया। साथ ही शिक्षा विभाग के 6 प्रतिभावान शिक्षक एवं छात्रों को सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग के हीरक जयंती के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का भी आयोजन किया गया है, जिसमें देशभर से शिक्षाविद शामिल होकर अपने विचार रखेंगे।

इससे पूर्व रेवेंशा विवि के कुलपति प्रो. इसान पात्र ने स्वागत भाषण एवं शिक्षा विभाग के मुख्य डॉ. सुदर्शन ने विषय प्रवेश कराया। कार्यक्रम के अंत में हीरक जयंती कमेटी के अध्यक्ष प्रो. गौरांग चरण नंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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