संवाद सूत्र, कटक : जैन धर्म गुरु आचार्य महाश्रमणी जी पूरे देश का भ्रमण कर लोगों को सत्य, अ¨हसा एवं सद्भावना का पाठ पढ़ा रहे हैं। ओडिशा में भी जगह जगह आचार्य ने जैन समुदाय के लोगों के साथ विभिन्न समाज के लोगों को यह संदेश दिया। कटक में तो पूरे देश से आए जैन संप्रदाय के लोगों ने आचार्य के संदेश को सुना एवं समझा। उस समय कइयों ने गुरुजी के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया मगर उसी समाज के पांच सदस्यों पर तेरापंथ भवन में अनियमितता करने, शांति व्यवस्था भंग करने का मामला इन दिनों न सिर्फ कटक शहर, बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। आलम यह हुआ कि मामला पुलिस थाने तक पहुंचा और तेरापंथ भवन में धारा 144 लागू करने की मांग की गई है। जैन श्वेतांबर भवन चैरिटेबल ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों पर मनमानी करने एवं शांति व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया गया है।

पूरीघाट थाना अंतर्गत काठगड़ा साही स्थित जैन श्वेतांबर तेरापंथ भवन के सदस्य एवं व्यवसायी अशोक सिपानी ने एक्जक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में धारा 144 लागू करने के लिए आवेदन किया है। इसमें भवन के ट्रस्टी मोहनलाल ¨सघी, मुकेश सेठिया, मोहनलाल चौरड़िया, मानिकचंद पुगलिया एवं मंगलचंद चोपड़ा पर जैन श्वेतांबर तेरापंथ भवन में अनियमितता एवं शांति व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया है। बताया गया है कि ट्रस्टी अपनी मनमानी करते आ रहे हैं। इस तरह की घटना को लेकर पहले भी पूरीघाट थाना में एक मामला दर्ज किया गया था लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसीपी एवं एक्जक्यूटिव मजिस्ट्रेट जी महाकुड़ ने नामजद व्यक्तियों के भवन जाने पर रोक लगा दी है। महाकुड़ के निर्देशानुसार नामजद लोग अब भवन में कोई बैठक या सभा नहीं कर सकते हैं। एडीसीपी ने पूरीघाट थाना को भी आदेश दिया है कि अगर यह सभा करते पाए जाते हैं या इनके द्वारा कोई भी अनियमितता बरती जाती है तो फिर इन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

मामला कुछ भी हो मगर जिन लोगों पर आचार्य महाश्रमण की अ¨हसा यात्रा एवं कटक प्रवास के दौरान पूरे समाज में सत्य अ¨हसा एवं सद्भावना के प्रचार-प्रसार करने की जिम्मेदारी थी, इन्हीं लोगों के इस तरह की अनियमितता में नामजद पाए जाने पर समाज में चर्चा का बाजार गर्म है।

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ये हैं आरोप

-तेरापंथ भवन समिति ट्रस्ट की संपत्ति का क्रय-विक्रय कर रजिस्ट्रेशन कार्यालय को जानकारी न देना

-ट्रस्ट की बैठक में महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी से वंचित रखना।

-10 साल तक इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा गया जबकि एक साल पहले टैक्स दिया गया है।

-सीडीए से मिली अनुमति के बदले 30 हजार वर्ग फीट में भवन का निर्माण किया है।

-ट्रस्ट के कागजात कुछ लोगंों के सहयोग से दबाकर रखना।

-मनमाने तरीके से ट्रस्ट से लोगों को जोड़ना और हटाना तथा फर्जी सदस्य बनाए गए हैं।

Posted By: Jagran