जागरण संवाददाता, कटक : शिक्षक एवं अभिभावक बच्चों को उड़ने की आजादी दें। बच्चे जो करना चाहते हैं, उस दिशा में उन्हें प्रोत्साहित करें। रेवेंशा विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति प्रो. गणेशी लाल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए यह बात कही।

रेवेंशा विवि सेवन पिलर परिसर में आयोजित इस समारोह में राज्यपाल ने कहा कि ईगल पक्षी छोटा होने के बावजूद वह आसमान को छूना चाहता है। उसी तरह से बच्चों में भी सपने होते हैं। बच्चों का भविष्य संवारने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है।

राज्यपाल ने कहा कि केवल विज्ञान से प्रगति संभव नहीं है। इसके लिए जो आध्यात्मिक तत्व है, वह भी अहम है। उन्होंने ने भगवत गीता के श्लोक के जरिए इसे सबके सामने रखा। कहा कि विश्वविद्यालय एवं विश्व, एक मुद्रा के दो पहलू हैं। छात्र-छात्रा शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति विज्ञान आदि को अहमियत देते हुए अपने साम‌र्थ्य के हिसाब से काम करें। इससे वे अपनी प्रतिभा को सबके सामने ला सकेंगे।

मुख्य अतिथि बायो टेक्नोलॉजी विभाग, भारत सरकार की सचिव डॉ. रेणू स्वरूप ने विज्ञान के क्षेत्र में आए बदलाव, खासकर भारत में जिस प्रकार से तेजी से विज्ञान में बदलाव आया है, इस पर ध्यान देने के लिए छात्रों से आह्वान किया। छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा दिए जाने वाले सम्मान को जीवन में याद कर भारत का गौरव बढ़ाने की सलाह दी।

इस मौके पर पद्मविभुषण प्रो. डॉ. प्रकाश नारायण टंडन को डॉक्टरेट ऑफ साइंस उपाधि से नवाजा गया। इसके अलावा थिएटर कलाकार अनंत महापात्र, इतिहासकार डॉ. निवेदिता महांती को डीलिट, रेवेंशा रेगुलर कोर्स में शौर्य नायक, प्रोफेसनल कोर्स में विटन भट्टाचार्य को शीर्ष ग्रेजुएट के तौर पर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर 78 छात्रों को पीएचडी की उपाधि, पीजी में 31 एवं ग्रेजुएट में 30 छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। समारोह में रेवेंशा के कुलपति प्रो. इसान पात्र, सचिव अशोक दास एवं डॉक्टर संगीता रथ प्रमुख उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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