संसू, भुवनेश्वर : निरतार अनुष्ठान 1984 से एक स्वयंशासित संस्थान के रूप में काम कर रहा है। केंद्रीय सामाजिक न्याय सशक्तीकरण मंत्रालय के दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग के तहत काम कर रहे इस संस्थान में तब से कारखाना अधिनियम (फैक्ट्रीज एक्ट) लागू नहीं है। बावजूद इसके इस संस्थान में मजदूर संगठनों को विभिन्न प्रोत्साहन मिल रहा है। निरतार के कामकाज में कारखाना अधिनियम को किसी तरह से लागू नहीं किया गया है। हाल ही में इस पर लोकसभा के सांसद रमेश सेवाली ने विगत 6 फरवरी को संसद में पूछे गए सवाल नंबर 567 का जवाब रखते हुए सामाजिक न्याय व सशक्तीकरण मंत्री कृष्णपाल गुज्जर ने माना कि देशभर में मंत्रालय के इन राष्ट्रीय संस्थान में कई सालों से कारखाना अधिनियम लागू न होने के बावजूद यहां पर मजदूर संघ है। निरतार एक राष्ट्रीय संस्थान होने के कारण इसमें एक मजदूर संघ है जो कि अनपेक्षित है व इसकी वैधता केंद्रीय मंत्री ने जो कुछ संसद में कहा उसके विपरीत है। मंत्री ने कह दिया कि राष्ट्रीय संस्थान में इस तरह से मजदूर संघ करना गैरकानूनी है। लेकिन मंत्रालय का प्रशासनिक विभाग सभी राष्ट्रीय संस्थान से इसे पूरी तरह हटाने के लिए कदम नहीं उठाया है। इससे राष्ट्रीय संस्थानों से सरकार की मजदूर संघ को हटाने को लेकर एक प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है व निरतार जैसे संस्थानों में एक समांतर प्रशासनिक व्यवस्था चलाकर दिव्यांगो के लिए किए जाने वाले काम में अडंगा डालने जैसी बात हो रही है।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस