21 को उत्कल धरा में प्रवेश करेगी आचार्य महाश्रमण की अ¨हसा यात्रा

Publish Date:Fri, 08 Dec 2017 02:41 AM (IST) | Updated Date:Fri, 08 Dec 2017 02:41 AM (IST)
21 को उत्कल धरा में प्रवेश करेगी आचार्य महाश्रमण की अ¨हसा यात्रा21 को उत्कल धरा में प्रवेश करेगी आचार्य महाश्रमण की अ¨हसा यात्रा
जैन धर्म गुरु महाश्रमण की अहिंसा यात्रा 2018 उत्कल की पावन धरा में 21

शेषनाथ राय, भुवनेश्वर : जैन धर्म गुरु महाश्रमण की अहिंसा यात्रा 2018 उत्कल की पावन धरा में 21 दिसंबर से शुरू हो रही है, जो कि फरवरी माह तक जारी रहेगा। समाज में अ¨हसा, नैतिकता, नशामुक्ति एवं सद्भाव की अलख जगाने के लिए जैन धर्म गुरू आचार्य महाश्रमण 9 नवंबर 2014 को ऐतिहासिक लालकिला (दिल्ली) से इस त्रिआयामी यात्रा का आगाज किया है, जो लगभग 45000 किलो मीटर की दूरी तय करने के दौरान भारत वर्ष के अनेक राज्यों के अलावा नेपाल, भूटान आदि विदेशी धरा को भी स्पर्श करते हुए ओडिशा की धरा पर आगामी 21 दिसंबर को पहुंच रहे है। महाश्रमण की इस यात्रा को लेकर प्रदेश भर के जैन समाज के लोगों में उत्साह एवं उल्लास का माहौल है। वहीं इस बीच ओडिशा सरकार ने आचार्य महाश्रमण को राज्य अतिथि का दर्जा देकर आचार्य महाश्रमण के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया है और राज्य के जैन समाज के लोगों के उत्साह को और बढ़ा दिया है।

आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रकाश बेताला से दैनिक जागरण को इस यात्रा को लेकर हुई विशेष बातचीत में बताया कि अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य महाश्रमण जी के सानिध्य में जीवन संवराने का यह वास्तव में जीवन का सर्वश्रेष्ठ अवसर है। आचार्य प्रवर की प्रेरणा पाकर लोग अपना जीवन संवारे तथा परिवार एवं समाज तथा राज्य के लिए अनुकरणीय बन यही अपेक्षा है। अनैतिकता से सराबोर माहौल में आचार्य श्री की यह अ¨हसा यात्रा आशा की किरण की तरह है। इसमें कोई शक नहीं कि भविष्य में जब भी नैतिकता, सद्भाव एवं व्यसन मुक्ति पर चिंतन होगा, तब आचार्य महाश्रमण की अ¨हसा यात्रा के निहितार्थ का सहारा लिए बिना बात आगे नहीं बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि आचार्य तुलसी के अणुव्रत गीत की इन पंक्तियों को चरितार्थ करने का प्रयास है यह अ¨हसा यात्रा। उन्होंने बताया कि सुधरे व्यक्ति समाज व्यक्ति से राष्ट्र स्वयं सुधरेगा, इन पंक्तियों के फलार्थ देश के प्रत्येक नागरिक को निष्ठावान, चरित्रवान, नैतिकता सम्पन्न, सद्भाव एवं नशामुक्त व्यक्तियों का सामाजिक समूह बनाकर सम्पूर्ण राष्ट्र को शक्तिशाली, वैभव सम्पन्न, सामाजिक समरसता पूर्ण देश निर्माण का संकल्प ही इस अ¨हसा यात्रा का उद्देश्य है।

बेताला ने बताया कि झारखंड संवेद शिखर तीर्थ होते हुए अ¨हसा यात्रा ओडिशा के पावन भूमि पर 21 दिसंबर 2017 को ओड़िशा के रायरंगपुर जिला अन्तर्गत बड़ाडालिमा में प्रवेश करेगी एवं 13 जनवरी 2018 से 18 जनवरी 2018 तक पूज्य श्री का प्रवास उत्कल की राजधानी ¨लगराज महाप्रभु की पावन भूमि भुवनेश्वर में होगा। इस दौरान नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम, व‌र्द्धमान महोत्सव, विभिन्न संगोष्ठियों के साथ साक्षातकार, वार्तालाप जैसे कई कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।

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Web Title:utkal yatra(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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