भुवनेश्वर, जेएनएन। प्रसव पीड़ा में 36 घंटे से अधिक समय तक एक महिला को छटपटाना पड़ा। तकलीफ सहन न कर महिला बीच-बीच में मूर्छित भी हो रही थी, मगर महिला का दर्द सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था। यह घटना और कहीं नहीं बल्कि बारीपदा स्थित पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कालेज की है। परिवार के लोग डाक्टर से आपरेशन के जरिए डिलेवरी करने के लिए निवेदन करते रहे मगर डाक्टर ने कहा नार्मल डिलेवरी के लिए इंतजार करो। इसके पीछे कारण था कि महिला एड्स रोगी थी।

हालांकि मौके पर मीडिया के कुछ सदस्यों के पहुंचने के बाद उक्त महिला का आपरेशन कर दिया गया। उसने एक मरी हुई शिशु कन्या को जन्म दिया। इलाज में लापरवाही के कारण शिशु कन्या की मृत्यु होने का आरोप महिला के परिवार वालों ने लगाया है। प्रदेश में यह कोई पहली घटना नहीं है बल्कि मयूरभंज जिले में भी एड्स रोगी को इलाज में हर समय अनादर किए जाने का आरोप सामने आया है।

क्या है पूरा मामला  

प्राप्त खबर के मुताबिक घटना इस प्रकार है। मयूरभंज जिले के जामदा इलाके की महिला को प्रसव पीड़ा होने के बाद उसे 12 दिसम्बर को जामदा अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बाद में उसे बारीपदा मेडिकल कालेज के लिए स्थानान्तरित कर दिया गया। 12 दिसम्बर की रात से महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी मगर उसका कोई इलाज नहीं कर रहा था, यह आरोप महिला के पति ने लगाया है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए महिला के पति ने कहा कि मीडिया प्रतिनिधि आने के बाद उसकी पत्नी को आपरेशन के लिए ले जाया गया। मृत शिशु कन्या जन्म लेने के बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए उत्तेजना का भी माहौल बन गया था। इस संदर्भ में प्रसूति विभाग या फिर मेडिकल कालेज के अधिकारियों ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी। 

यहां उल्लेखनीय है कि मयूरभंज जिले में कुल 1089 एचआईवी पाजिटिव रोगी हैं। इसमें से 600 पुरुष, 437 महिला एवं 52 छोटे बच्चे हैं। हर साल 14 से 19 एचआईवी पीड़ित की मौत यहां होती है। ऐसे में एचआईवी संक्रमित मरीजों के साथ इस कदर भेदभाव को लेकर लोगों ने नाराजगी जाहिर की है।

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Posted By: Babita kashyap

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