भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। पुरी जगन्नाथ मंदिर परिक्रमा प्रोजेक्ट को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। प्रत्येक दिन इसमें नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं। तीन दिन पहले एमार मठ परिसर से खुदाई के दौरान टूटी हुई सिंह की मूर्ति मिली थी। इसे लेकर विभिन्न वर्ग के लोगों ने सरकार को घेरा था। एएसआई अधीक्षक के खिलाफ इस संदर्भ में मामला भी दर्ज हुआ था। ऐसे में अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षक अरूण मलिक ने अपनी जो प्रतिक्रिया दी है, वह चौंकाने वाली है। एएसआई अधीक्षक के बयान से स्पष्ट हो रहा है कि सरकार जानबूझकर जगन्नाथ मंदिर परिक्रमा प्रोजेक्ट के तहत खुदाई कर रही है।

एएसआई क्षेत्रीय अधीक्षक मलिक ने कहा है कि पुरी एक ऐतिहासिक स्थल है। श्रीजगन्नाथ मंदिर के आस-पास पुराने कीर्तिराज भरे पड़े हैं। ऐसे में यहां पर किसी भी प्रकार की खुदाई की जाएगी तो पुराने कीर्तिराज मिलने की पूरी सम्भावना है। यह बात मैं आज नहीं बहुत पहले से कहते आ रहा हूं। राज्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी कई बार मैने इस बात को कही है। टूटी हुई सिंहमूर्ति मिलने की घटना के बारे में उन्होंने कहा है कि ओबीसीसी के अनुरोध पर हम वहां गए थे एवं जांच कर रहे हैं। खुदाई में एक पुरानी सिंह की मूर्ति मिली है। इसके अलावा अन्य कुछ मूर्तियां भी मिली हैं। अभी हम अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं किए हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद उच्च अधिकारियों को देंगे। काम बंद किया जाए या नहीं, उस संदर्भ में वरिष्ठ अधिकारी निर्णय लेंगे। वहीं एएसआई के क्षेत्रीय अधीक्षक का बयान आने से पहले पुरी सांसद पिनाकी मिश्र ने ट्वीट कर लिखा है कि जगन्नाथ मंदिर प्रोजेक्ट स्थल खुदाई के लिए जीपीआरएस सर्वे किया गया है। इस संबन्ध में कागजात दिखाए जाएंगे। बिना जीपीआरएस में खुदाई किए जाने की शिकायत आधारहीन है।

यहां सवाल यह उठ रहा है कि यदि जीपीआरएस सर्वे हुआ था, तो फिर मिट्टी के नीचे क्या है कैसे पता नहीं चला। अब खुदाई के समय कैसे मूर्तियां मिल रही हैं।

Edited By: Babita Kashyap