800 रुपये बोनस और नियमों में ढील का असर, धान खरीद रजिस्ट्रेशन में भारी उछाल
सुंदरगढ़ जिले में धान खरीद के लिए किसानों के पंजीकरण में भारी उछाल आया है, जिसका मुख्य कारण 800 रुपये ...और पढ़ें

800 रुपये बोनस और नियमों में ढील का असर, धान खरीद रजिस्ट्रेशन में भारी उछाल (AI Generated Image)
HighLights
सुंदरगढ़ में धान खरीद पंजीकरण में भारी वृद्धि दर्ज की गई।
800 रुपये बोनस और एग्रीस्टैक में ढील मुख्य कारण।
किसानों की संख्या 73,224 तक पहुंची, पिछले साल से अधिक।
जागरण संवाददाता, राउरकेला। खरीफ धान खरीद के लिए सरकार द्वारा घोषित 800 रुपये प्रति क्विंटल के अतिरिक्त बोनस और एग्रीस्टैक की अनिवार्यता में दी गई ढील का जिले में व्यापक असर देखने को मिला है।
इन फैसलों के बाद सुंदरगढ़ जिले में धान बिक्री के लिए किसानों के पंजीकरण में भारी उछाल आया है। सात सितंबर तक पंजीकृत किसानों का आंकड़ा 73,224 तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष पंजीकृत 61,977 किसानों की तुलना में 11,247 अधिक है।
इस रिकॉर्ड वृद्धि ने स्पष्ट कर दिया है कि आर्थिक प्रोत्साहन और नियमों के सरलीकरण से सरकारी खरीद व्यवस्था के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। शुरुआती दौर में पंजीकरण की रफ्तार काफी धीमी थी। जटिल सरकारी नियमों और विशेषकर एग्रीस्टैक को अनिवार्य किए जाने के कारण किसानों में असमंजस था।
31 अगस्त की निर्धारित समय-सीमा तक जिले में केवल 59,106 किसान ही पंजीकृत हो सके थे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 2,871 कम थे।
किसानों की मांग और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए सरकार ने एग्रीस्टैक की अनिवार्यता में ढील दी और पंजीकरण की अवधि को सात दिन के लिए बढ़ा दिया, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह से बदल गई।
किसानों के इस उत्साह का सबसे बड़ा कारण 800 रुपये का बोनस माना जा रहा है। इसके अलावा, जिला कृषि विभाग द्वारा सुंदरगढ़ में धान की खेती का लक्ष्य बढ़ाया जाना और विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को उन्नत किस्म के धान की खेती के लिए दी जा रही सहायता भी कारगर साबित हुई है।
जिले में 83 सहकारी संस्थाओं और 'जगन्नाथ शक्ति' के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 73,197 किसानों के पास फार्मर कोड उपलब्ध है, जबकि 17,601 किसान एग्रीस्टैक से जुड़ चुके हैं।
पंजीकरण के इन उत्साहजनक आंकड़ों के बीच जमीनी हकीकत पर भी ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। जानकारों का मानना है कि किसानों को इस बोनस का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब धान खरीद केंद्रों (मंडी) पर होने वाली अनुचित कटनी-छंटनी पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जाए।
यदि खरीद प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो किसानों की कड़ी मेहनत का फायदा उन्हें मिलने के बजाय मिलरों और व्यवस्था में बैठे लोगों तक सिमट जाने की आशंका बनी रहेगी। इसलिए प्रशासन को खरीद केंद्रों पर अभी से कड़ी निगरानी की रूपरेखा तैयार करनी होगी।
