भुवनेश्वर, शेषनाथ राय। कोरोना नियंत्रण में आने के बाद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। अभिवृद्ध दर पुन: स्वभाविक हो जाएगी। यह बात कुछ ही महीने आर्थिक विशेषज्ञों ने कही थी मगर आर्थिक विशेषज्ञों की बात अब गलत प्रमाणित होने जा रही है। क्योंकि दोबारा लौट रहा कोरोना का डर एक बार फिर लोगों को सताने लगा है। पिछले साल अंतिम चरण में लॉकडाउन खत्म होने के बाद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी थी। प्रदेश मंदी से निकलकर सामान्य की तरफ अभी बढ़ना शुरू ही किया था कि एक बार कोरोना का डर सताने लगा है। समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। 

इस बीच राज्य में नया आर्थिक साल शुरू हो गया है। 2021-22 आर्थिक साल के लिए बजट में 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। पिछले साल के बजट का आकार सामान्य बजट एवं अतिरिक्त बजट को मिलाकर 1 लाख 61 करोड़ रुपये था। हालांकि कोरोना के कारण बजट खर्च दर पूरा धीमा थी। यहां तक कि आर्थिक वर्ष के अंत तक बजट का लगभग 20 प्रतिशत अर्थ भी खर्च नहीं हो सका। लॉकडाउन एवं शटडाउन के प्रभाव से पिछले साल अर्थनीति सम्पूर्ण रूप से प्रभावित हुई थी। हालांकि इस साल अर्थनीति के चलचंचल होगी एवं विकास की गति रफ्तार पकड़ने की जो आशा थी वह वह कोरोना लौटने के बाद पुन: अनिश्चितता के घेरे में चली गई है। 

 

पुन: एक बार कोरोना पैर पसारने लगा है

कोरोना के लिए 2020-21 आर्थिक साल में अभिवृद्धि दर 4.92 तक आने का पहले से पूर्वानुमान किया गया है। हालांकि जब अर्थनीति के उठने का समय आया है तो पुन: एक बार कोरोना पैर पसारने लगा है। कोरोना को लेकर हर क्षेत्र में एक बार पुन: डर सताने लगी है। संक्रमण नियंत्रण से बाहर जाने पर लॉकडाउन एवं शटडाउन लागू किए जाने की बात स्वास्थ्य मंत्री कह चुके हैं। यदि कोरोना के लिए पुन: लॉकडाउन एवं शटडाउन की स्थिति आती है तो फिर आर्थिक स्थिति बिगड़ने का अनुमान लगाया गया है। सरकार को भरोसा था कि आगे चल राजस्व अदायगी में बढ़ोत्तरी होगी क्योंकि पिछले आर्थिक साल में 22 प्रतिशत शुल्क राजस्व संग्रह कम होने के कारण वास्तव में 2020-21 के अंत तक राजस्व संग्रह में 13 प्रतिशत की गिरावट के साथ ही 16 से 17 हजार करोड़ रुपये कमी आने का आकलन किया गया है। 

 घोर आर्थिक संकट 

अर्थनीति को कोविड से मुकाबला करने एवं विकास की गति को त्वरान्वित करने के लिए अंतिम हथियार के तौर पर राज्य सरकार ने वित्तीय घाटे को 5 प्रतिशत तक बढ़ाने एवं कर्ज का परिमाण बढ़ाने के लिए योजना बनायी है। हालांकि वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए सरकार की मुश्किलें बढ़ने के साथ ही कर्ज की राशि का पूंजी निवेश में विनियोग ना करने पर समान परिमाण में संपत्ति सृष्टि नहीं हो पाएगी। इसके लिए ब्याज देना होगा और मूलधन तथा ब्याज देने के लिए सरकार को घोर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।


दैनिक मामले 500 के पार 

इसके अलावा कर्ज की राशि को पूंजी आकार में विनियोग ना करने पर राज्य सरकार अपने संबल को भी नहीं बढ़ा पाएगी और लोगों को रोजगार भी नहीं दे पाएगी। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामले 500 के पार पहुंच गए हैं। विभिन्न शहरों में व्यक्तिगत दुराव, मास्क पहनना अनिवार्य जैसे नियम को सख्ती के साथ अनुपाल कराने के साथ ही दुकानों पर भीड़भाड़ देखने पर उन्हें सील किया जा रहा है। ऐसे में व्यवसाय जो थोड़ा सा गति पकड़ा था उसकी रफ्तार भी कम होने लगी है। बार, कोचिंग सेंटर, विद्यालय, महाविद्यालय हर जगह पुन: कोरोना का डर सताने लगा है। 

जीवन जीविका बुरी तरह से प्रभावित होगी

ऐसे में यदि कोरोना संक्रमण के बीच पुन: लॉकडाउन एवं शटडाउन को लागू किया जाता है तो फिर व्यवसाय पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। राज्य में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत 92 प्रतिशत श्रमिक हाथ पर हाथ धरे बैठने को मजबूर हो जाएंगे। इससे आर्थिक गतिविध मंदी होगी और जीवन जीविका बुरी तरह से प्रभावित होगी। सरकार एवं प्रशासन की तरफ से अभी से शहर बाजार होटल रेस्टोरेंट, दैनिक होटल में भीड़ को कम करने के लिए नाना प्रकार के कदम उठाए जा रहे हैं, मगर लोग अब जागरूक नहीं हो रहे हैं। ऐसे में यदि लोग जागरूक नहीं हुए तो फिर आगे विपदा और गम्भीर हो सकती है।

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