जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : महाप्रभु श्री जगन्नाथजी के रत्न भंडार की खोई चाबी की नकली चाबी मिलने को लेकर राज्य में राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा सरकार और पुरी जिलाधिकारी की ¨नदा किए जाने के एक दिन बाद शनिवार को वरिष्ठ बीजद नेता दामोदर राउत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने सवाल किया है कि जिलाधिकारी ने जैसा दावा किया है कि खोई हुई चाबी की नकली चाबी मिल गई है, अगर असली चाबी लापता है तो उसकी नकली चाबी मिलना कैसे संभव है। उन्होंने इस प्रकरण पर आ रहे नेताओं के बयानों की भी निंदा की। कहा कि ओड़िया लोगों के लिए यह स्वीकार्य नहीं है। महाप्रभु जगन्नाथ ओड़िया लोगों के पीठासीन देवता हैं। इस मामले में राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। राउत ने कहा कि पिछले 45 वर्षों में रत्न भंडार खोले जाने के बारे में मैंने कभी नहीं सुना। कहा जा रहा है कि 1978 में जब रत्न भंडार खोला गया था, उस समय विश्वभूषण हरिचंदन विधि मंत्री थे। इसलिए उन्हें चाबी मामले में स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रत्न भंडार वास्तव में एक पवित्र स्थान है, लेकिन जो चीजें हुई, वह खेदजनक है। उन्होंने पूछा है कि एसजेटीए और जिला प्रशासन ने चार-पांच माह पूर्व रत्न भंडार नहीं खोला। अगर नकली चाबी थी, तो प्रशासन को खोजने से किसने रोका था। चाबी मामले को राजनीतिक खेल करार देते हुए राउत ने कहा कि अगर कोई नकली चाबी थी, तो किसी को इसके बारे में पता क्यों नहीं था और यह कहां है, इसकी जानकारी किसी के पास क्यों नहीं थी। यह सब चीजें लोगों में संदेह पैदा करती हैं। केवल महाप्रभु जगन्नाथ इसका समाधान कर सकते हैं। राउत ने सवाल किया है कि मुझे समझ नहीं आता कि जिलाधिकारी ने ऐसा क्यों कहा कि वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। वे क्यों जांच का सामना करेंगे या फिर वे क्यों मालिक बन रहे हैं।

राउत के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में पूर्व विधि मंत्री विश्व भूषण हरिचंदन ने कहा कि मुझे नकली चाबी के बारे में कुछ नहीं पता। श्री जगन्नाथ मंदिर के कानून में रत्न भंडार की नकली चाबी के बारे में कुछ भी उल्लिखित नहीं है। सरकार कुछ जानकारियां छिपाना चाहती है। हरिचंदन ने कहा कि यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि जिलाधिकारी किसके लिए कार्य कर रहे हैं। हरिचंदन ने साथ ही कहा कि चाबी का रखरखाव प्रशासन की जिम्मेदारी है न कि मंत्री का। उस समय अंतरिम आदेश मिलने के बाद सरकार ने रत्न भंडार को खोलने और उसके अंदर रखे आभूषणों और अन्य कीमती सामग्री की जांच का आदेश दिया था। लेकिन कभी भी चाबियों का रखरखाव मंत्री का कार्य नहीं रहा। मंदिर प्रशासन और जिलाधिकारी इसकी देखरेख करते हैं। उन्होंने कहा कि अचानक नकली चाबी बरामद होने के पीछे कोई रहस्य है।

Posted By: Jagran