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पुरी, जेएनएन। श्रीमंदिर की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार को क्रियाशील होना चाहिए एवं इन सभी कार्य में शंकराचार्य की सलाह ली जानी चाहिए। यह बात केन्द्र मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने श्रीमंदिर के चारों तरफ चल रहे उच्छेद प्रसंग पर मीडिया के सामने कही है। गुरुवार को पुरी दौरे पर आए केन्द्र मंत्री श्री प्रधान ने गोवर्द्धन पीठ में जाकर जगतगुरू शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज से मुलाकात कर इसी प्रसंग पर विचार विमर्श किया है। 

प्रधान ने कहा कि आज 21वीं शताब्दी में हजारों साल पुरानी परंपरा को आधार कर आधुनिक व्यवस्था होनी चाहिए। इस व्यवस्था को यत्नशील ढंग से लागू किया जाए और इन सभी कार्य में शंकराचार्य का मत लेना जरूरी है। प्रधान ने कहा कि यहां पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ को स्थापित करने में शंकराचार्य की बहुत बड़ी भूमिका रही है। श्रीमंदिर की परंपरा, पूजाविधि के लिए शंकराचार्य का मत लिया जाना उचित है। श्रींदिर के प्रसंग में यहां के स्थानीय लोगों विशेषकर गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव की सहभागिता होनी चाहिए।

गौरतलब है कि श्रीक्षेत्र धाम पुरी शहर को देश का ऐतिहासिक शहर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। इसके लिए वाधा बनने वाले सदियों पुराने ऐतिहासिक धरोहरों को ध्वस्त किया जा रहा है, ऐसे में नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटाक) ने विरासत संरचनाओं को बहाल करने में मदद की पेशकश की है। मुख्यमंत्री को ज्ञापन देते हुए संगठन ने कहा है कि यहां कि धार्मिक संरचनाएं पवित्र हैं और श्री जगन्नाथ मंदिर के पूजा अर्चना से संबंधित होने के साथ सांस्कृतिक विरासत भी हैं। 

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यहां बताना उचित होगा कि धार्मिक नगरी पुरी को विश्व स्तरीय विरासत स्थल बनाने के लिए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 775 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है, मगर 500 करोड़ रुपये ही मंजूर किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने श्रीमंदिर के आस-पास 75  मीटर के क्षेत्र को खाली करने का निर्देश भी दिया है। इसके अन्तर्गत अब तक दो प्राचीन मठ तोड़े जा चुके हैं। स्थानीय लोगों में इन मठों को तोड़ने के खिलाफ असंतोष का माहौल है। पुरी श्रीमंदिर के इर्द-गिर्द बने ये मठ सदियों पुराने हैं और महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के सेवा से जुड़े हुए हैं। इन आस्था केन्द्रों को हटाने के फैसले के खिलाफ लोगों का असंतोष अंदर ही अंदर बढ़ रहा है। 

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Posted By: Babita kashyap

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