जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : पुरी के निकट समुद्र तट पर लहरों के कारण हो रहे बालू के कटाव की जांच के लिए चेन्नई से पहुंची विशेषज्ञों की टीम ने इसकी रोकथाम के लिए सिंथेटिक प्राचीर व सी वॉल, बनाने का सुझाव दिया है। मंगला नदी के मुहाने पर रिटेनिंग वॉल बनाया जाएगा ताकि नदी का जल समुद्र में आसानी से मिल सके। इस महत्वाकाक्षी योजना पर 14 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है। विशेषज्ञ दल ने मंगला नदी मुहाने से स्वर्ग द्वार तक के इलाके का मुआयना किया। चेन्नई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओसन टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक अरुण कुमार अहलुवालिया, सत्य किरन राजू, पी के पाणिग्राही के अलावा पुरी जलसंपदा विभाग के इंजीनियर समुद्र तट का मुआयना करने पहुंचे थे। पुरी जल संपदा विभाग के इंजीनियर प्रमोद कुमार राउत ने कहा कि सन 2006 और 2016 में भी पुरी के समुद्र तट में लहरों के कारण काफी नुकसान हुआ था। पुरी समुद्री तट के अलावा पुरी, कोणार्क समुद्री वेल व्यू रोड़ का भी मुआयना किया गया। गौरतलब है कि रामचंडी के पास भी समुद्र की लहरों के कारण तट का बड़ा हिस्सा बह गया है।

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