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Rourkela Steel Plant के भविष्य को मिलेगी नई रफ्तार: Sail को विदेशों में खनिज संपत्तियां तलाशने का निर्देश

Published: Tue, 06 Oct 2026 08:23 PM (IST)

केंद्र सरकार ने सेल और एनएमडीसी को विदेशों में खनिज संपत्तियां तलाशने का निर्देश दिया है, जो राउरकेला स्टील प्लांट के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

राउरकेला स्टील प्लांट देश के सबसे प्रमुख और आधुनिक सरकारी इस्पात संयंत्रों में से एक है।

राउरकेला स्टील प्लांट देश के सबसे प्रमुख और आधुनिक सरकारी इस्पात संयंत्रों में से एक है।

HighLights

  1. राउरकेला स्टील प्लांट की कच्चे माल की आपूर्ति होगी सुरक्षित।

  2. उत्पादन लागत घटेगी, प्लांट की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

जागरण संवाददाता राउरकेला। इस्पात नगरी राउरकेला और यहां के राउरकेला स्टील प्लांट (आरएसपी) के लिए एक बेहद सकारात्मक और दूरगामी परिणाम वाली खबर सामने आई है। 
 
कच्चे माल की आपूर्ति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। सरकार ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और एनएमडीसी को विदेशों में खनिज संपत्तियों और माइनिंग एसेट्स (खदानों) की तलाश करने का निर्देश दिया है। 
 
यह ऐतिहासिक फैसला सेल की प्रमुख इकाइयों विशेषकर राउरकेला स्टील प्लांट के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
 
राउरकेला स्टील प्लांट (आरएसपी) देश के सबसे प्रमुख और आधुनिक सरकारी इस्पात संयंत्रों में से एक है। यहां उच्च गुणवत्ता वाले स्टील उत्पादन के लिए लौह अयस्क के साथ-साथ कोकिंग कोल की भारी मात्रा में आवश्यकता होती है। 
 
हालांकि भारत और ओडिशा राज्य में लौह अयस्क प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन आरएसपी सहित देश की अन्य स्टील कंपनियों को अपनी कोकिंग कोल की 85 से 90 प्रतिशत जरूरतें आयात से पूरी करनी पड़ती हैं। 
 
वर्तमान में राउरकेला स्टील प्लांट के लिए कोकिंग कोल मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और मोजाम्बिक जैसे देशों से आयात किया जाता है।
 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोकिंग कोल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर आरएसपी की उत्पादन लागत और मुनाफे पर पड़ता है। 
 
इसके अलावा, बेहतर गुणवत्ता वाले चूना पत्थर और पीसीआई कोयले की आपूर्ति के लिए भी विदेशी बाजारों पर निर्भरता बनी हुई है।
 
इस्पात मंत्रालय के इस नए निर्देश के बाद यदि सेल विदेशों में कोकिंग कोल या अन्य आवश्यक खनिजों की खदानों का अधिग्रहण करने या साझेदारी हासिल करने में सफल रहता है, तो आरएसपी को कच्चे माल की अबाधित आपूर्ति मिलेगी। 
 
अपनी खुद की खदानें या माइनिंग एसेट्स होने से राउरकेला स्टील प्लांट को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल के दाम बढ़ने पर भारी नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। 
 
इससे न केवल उत्पादन लागत को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, बल्कि प्लांट को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों से भी सुरक्षा मिलेगी। 
 
जेएसडब्लूय स्टील जैसी निजी क्षेत्र की इस्पात कंपनियां पहले से ही विदेशों में कोकिंग कोल खदानें खरीदकर अपनी कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित कर रही हैं। 
 
अब SAIL और NMDC का इस दिशा में कदम बढ़ाना राउरकेला स्टील प्लांट को निजी कंपनियों के मुकाबले बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। 
 
इसके साथ ही, लौह अयस्क की प्रमुख उत्पादक कंपनी एनएमडीसी भी 2030 तक अन्य खनिजों की खोज में अपना विस्तार कर रही है, जिससे इस्पात उद्योग को समग्र मजबूती मिलेगी। 
 
विदेशी खदानों की खरीद, उनके विकास और वहां से राउरकेला तक कच्चे माल के पहुंचने में समय और बड़ा निवेश लगता है। इसलिए, इसे तत्काल प्रभाव वाले कदम की जगह एक मजबूत दीर्घकालिक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
 
आरएसपी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आने वाले वर्षों में जब यह योजना धरातल पर उतरेगी, तो राउरकेला स्टील प्लांट आत्मनिर्भरता के नए शिखर पर होगा। 
 
कच्चे माल की यह सुरक्षा न केवल आरएसपी का मुनाफा बढ़ाएगी, बल्कि भविष्य के आधुनिकीकरण व विस्तार योजनाओं को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।