पुरी जगन्नाथ मंदिर के नीचे मिला गंगकालीन 'विरासत शहर', 30 फीट ऊंची दीवार और गुप्त कोठरियों का खुलासा
पुरी के जगन्नाथ मंदिर के आसपास हुए जीपीआर सर्वे में जमीन के नीचे गंगकालीन 'विरासत शहर' के संकेत मिले हैं। ...और पढ़ें

पुरी जगन्नाथ मंदिर के नीचे मिला गंगकालीन विरासत शहर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संतोष कुमार पांडेय, अनुगुल। ओडिशा स्थित पुरी की पावन धरती के नीचे इतिहास की एक पूरी दुनिया दबी होने के संकेत मिले हैं। श्री जगन्नाथ मंदिर के आसपास कराए गए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) सर्वे ने ऐसे चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसने पुरातत्वविदों और इतिहासकारों की जिज्ञासा बढ़ा दी है।
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के आसपास जमीन के नीचे गंग राजवंश काल का एक सुव्यवस्थित ‘विरासत शहर’ मौजूद है, जिसमें 43 महत्वपूर्ण स्थल, रहस्यमयी कोठरियां और समुद्र तट तक जाने वाली गुप्त सुरंग के संकेत शामिल हैं।
जमीन के नीचे व्यापक क्षेत्र में प्राचीन संरचनाएं
श्रीमंदिर परिक्रमा परियोजना के तहत कराए गए इस वैज्ञानिक सर्वे की जिम्मेदारी IIT गांधीनगर को सौंपी गई थी। लगभग 40 लाख रुपये की लागत से तैयार यह रिपोर्ट सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से सार्वजनिक हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी के विभिन्न हिस्सों में जमीन के नीचे व्यापक क्षेत्र में प्राचीन संरचनाएं फैली हुई हैं, जो उस दौर की उन्नत शहरी व्यवस्था का प्रमाण देती हैं।
दीवार, सिंह मूर्तियां और गुप्त कोठरी का रहस्य
सर्वे में 43 विरासत स्थलों की पहचान की गई है। इनमें करीब 30 फीट ऊंची प्राचीन सुरक्षा दीवार के अवशेष, गंगकालीन शैली की विशाल सिंह मूर्तियां और 7.6 मीटर लंबी तथा 3 मीटर चौड़ी एक रहस्यमयी कोठरी प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कोठरी का उपयोग प्राचीन काल में स्वर्ण मूर्तियों की पूजा या मंदिर की बहुमूल्य संपदा के सुरक्षित भंडारण के लिए किया जाता रहा होगा।
समुद्र तक जाती गुप्त सुरंग ने बढ़ाया रोमांच
सर्वे का सबसे रोचक पहलू मंदिर परिसर से समुद्र तट की ओर जाती एक संभावित गुप्त सुरंग के संकेत हैं। माना जा रहा है कि यह सुरंग आपातकालीन परिस्थितियों, धार्मिक अनुष्ठानों या आक्रमण के समय विग्रहों और खजाने को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए बनाई गई होगी। इस खोज ने पुरी के इतिहास को लेकर नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
इन क्षेत्रों में मिले अधिक संकेत
सर्वे के दौरान एमार मठ, नृसिंह मंदिर, बुढ़ी मां मंदिर और बड़दांड क्षेत्र के नीचे सबसे अधिक अवशेष मिलने के संकेत मिले हैं। ये क्षेत्र गंगकाल में धार्मिक और प्रशासनिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र माने जाते थे।
गंग राजाओं का स्वर्णिम योगदान
इतिहासकारों के अनुसार, अनंतवर्मन चोडगंग देव ने 12वीं शताब्दी में जगन्नाथ मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया था, जिसे बाद में अनंगभीम देव तृतीय ने पूर्ण किया।
-1774297013335.jpeg)
गंग राजाओं ने स्वयं को भगवान जगन्नाथ का ‘सेवक’ घोषित करते हुए अपने साम्राज्य को ‘पुरुषोत्तम’ के चरणों में समर्पित कर दिया था। इसी कारण पुरी केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक ‘दैवीय राजधानी’ के रूप में विकसित हुआ।
इस काल की वास्तुकला की झलक आज भी मंदिर और कोणार्क जैसे स्मारकों में दिखाई देती है। सर्वे में मिले नक्काशीदार पत्थर, मूर्तियां और संरचनाएं उस समय की उन्नत कलिंग शैली और तकनीकी दक्षता का प्रमाण हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी गहरा
विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के नीचे मिले ये अवशेष केवल स्थापत्य धरोहर नहीं हैं, बल्कि सनातन परंपरा के गहरे रहस्यों से भी जुड़े हैं। प्राचीन काल में पुरी में सैकड़ों मठ (मठा) सक्रिय थे, जिनमें से कई समय के साथ लुप्त हो गए। एमार मठ के आसपास मिले संकेत बताते हैं कि ये मठ मंदिर की सुरक्षा और आध्यात्मिक शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र रहे होंगे।
गुप्त कोठरियां और सुरंगें उस परंपरा को भी पुष्ट करती हैं, जिसमें आक्रमण के समय मंदिर के विग्रहों और खजाने को सुरक्षित रखने के लिए गुप्त स्थानों का उपयोग किया जाता था। वहीं, स्थानीय मान्यताओं में वर्णित ‘सिद्ध गुफाओं’ और साधना स्थलों को भी अब वैज्ञानिक आधार मिलता दिखाई दे रहा है।
संरक्षण की चुनौती और संभावनाएं
इस महत्वपूर्ण खोज के साथ संरक्षण की बड़ी चुनौती भी सामने आई है। पुरातत्व विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि इन संभावित स्थलों पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य से पहले वैज्ञानिक उत्खनन कराया जाए।
यदि इन अवशेषों को सही तरीके से संरक्षित और विकसित किया गया, तो पुरी न केवल आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि विश्व स्तर पर एक प्रमुख पुरातात्विक पर्यटन स्थल के रूप में भी उभरेगा।
"यह खोज सिद्ध करती है कि पुरी की मिट्टी के कण-कण में इतिहास और आध्यात्मिकता रची-बसी है। यदि इन 43 स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया गया, तो दुनिया जगन्नाथ संस्कृति के उस स्वर्ण युग को अपनी आंखों से देख सकेगी, जिसे अब तक केवल इतिहास के पन्नों में पढ़ा गया है।"
