Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के वीडियो से पुरी में विवाद, SJTA ने गठित की जांच समिति

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 08:55 PM (IST)

    श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शुभंकर मिश्रा के एक वायरल वीडियो की जांच के लिए समिति बनाई है। उस वीडियो के तथ्यों का धार्मिक विद्वानों ने खंडन किया है। एसजेटीए ने जनता से तथ्यों की पुष्टि करने और इन्फ्लुएंसर्स से जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील की है।

    Hero Image

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर।(जागरण)

    संवाद सहयोगी, पुरी। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने शनिवार को इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर शुभंकर मिश्रा के एक वायरल वीडियो की जांच के लिए एक समिति गठित की और जनता से अपील की कि 12वीं शताब्दी के इस मंदिर से जुड़े किसी भी तथ्य को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य परखें।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    कलेक्टर दिव्य ज्योति परिदा, जो एसजेटीए के उप मुख्य प्रशासक भी हैं, ने बताया कि यह कदम मिश्रा के यूट्यूब पोस्ट को लेकर फैली व्यापक नाराजगी के बाद उठाया गया है।

    वीडियो में कथित रूप से दावा किया गया था कि मंदिर आने वाले अविवाहित जोड़ों का 'राधा रानी के श्राप' के कारण ब्रेकअप हो सकता है।

    वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया था कि राधा रानी को पुजारी सेवकों ने मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया और उन्होंने मंदिर को श्राप दिया। हालांकि दैनिक जागरण स्वतंत्र रूप से इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

    परिडा ने कहा कि वीडियो हमारे संज्ञान में आया है और एक समिति इसकी जांच कर रही है। प्रशासन ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए कदम उठा रहा है जो मंदिर से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करता है, अफवाहें फैलाता है या भ्रामक जानकारी साझा करता है। ऐसे लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने सीधे तौर पर न तो इन्फ्लुएंसर का नाम लिया और न ही उनके वीडियो का। पुरी के धार्मिक विद्वानों ने कहा कि वीडियो में किए गए दावे किसी भी शास्त्र या पुराण में वर्णित नहीं हैं।

    श्री जगन्नाथ संस्कृति के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. भास्कर मिश्र ने कहा कि अपने शोध में मैंने कभी ऐसा कोई उल्लेख नहीं देखा। यह संभवतः काल्पनिक कथा है। भविष्य में ऐसे घटनाक्रमों को रोकने के लिए कड़ी व्यवस्था की जरूरत है।

    वरिष्ठ सेवक हजूरी कृष्णचंद्र खुंटिया ने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति को हमारी संस्कृति और परंपरा का कोई सम्मान नहीं है, वह सिर्फ टीआरपी के लिए ऐसा कर रहा है। यह अस्वीकार्य है।

    सेवकों और भक्तों ने इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से अपील की कि वे जिम्मेदारी से काम लें और कोई भी सार्वजनिक दावा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें, क्योंकि झूठे दावे सांस्कृतिक धरोहर को विकृत करते हैं और जनता की भावनाओं को आहत करते हैं। वीडियो के संबंध में टिप्पणी के लिए मिश्रा से संपर्क नहीं हो सका।