जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : पूर्व मंत्री तथा वरिष्ठ बीजद नेता विधायक दामोदर राउत एक बार फिर अपनी तीखी टिप्पणी को लेकर चर्चा में आ गए हैं। इससे बीजद खेमे में हड़कंप मच गई है। मंगलवार को नई दिल्ली के दौरे पर जाने से पहले मीडिया में राउत के खिलाफ आई शिकायत व वक्तव्य को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री सह बीजद सुप्रीम नवीन पटनायक ने स्पष्ट तो कुछ नहीं कहा लेकिन यह स्वीकार किया कि मेरे पास शिकायत आई है, दिल्ली से लौटने के बाद इस पर विचार करूंगा।

मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद विधायक दामोदर राउत के तेवर और तीखे हो गए। उन्होंने कहा कि मंत्री पद, पार्टी के उपाध्यक्ष पद, जिला पर्यवेक्षक पद से तो मुझे पहले ही हटा दिया गया है, अब मेरे खिलाफ इससे अधिक क्या कार्रवाई की जाएगी। अरुण साहू, बबी दास, देवाशीष सामंतराय एवं एक अधिकारी बीजद को वर्तमान समय में चला रहे हैं, उसमें मैं नहीं हूं। मैं बीजू जनता दल का विधायक हूं। जिस दिन बीजू शब्द हट जाएगा, मैं पार्टी में नहीं रहूंगा। दामोदर राउत ने विष्णु दास एवं प्रशांत मुदुली को टारगेट करते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को पैसा देकर मेरे खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए कहा जा रहा है। सबको पता है कि पार्टी विरोधी कार्य में कौन लोग लगे हैं।

गौरतलब है कि पूर्व मंत्री तथा विधायक दामोदर राउत पिछले कुछ दिनों से सरकार के खिलाफ चारा, ओमफेड एवं समवाय विभाग में हुई धांधली का आरोप लगाते रहे हैं। इसे लेकर जगत¨सहपुर में बीजद की तरफ से उनका विरोध किया गया था। यहां तक कि उनके खिलाफ मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास भी शिकायत जगत¨सहपुर के पूर्व विधायक तथा राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष विष्णु चरण दास एवं एरसमा-बालीकुदा विधायक प्रशांत मुदुली कर चुके हैं। मंगलवार को एरसमा-बालीकुदा इलाके के सैकड़ों सदस्य नवीन निवास पहुंचकर दामोदर राउत को पार्टी से बहिष्कार करने की मांग कर चुके हैं। अब पाली नवीन बाबू के हाथ में है जो कि अभी दिल्ली में हैं। दिल्ली से आने के बाद वह क्या कदम उठाते हैं, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।

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अक्सर चर्चा में बने रहते दामोदर राउत

जासं, भुवनेश्वर : जाजपुर की मीटिंग में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर अपमानजनक टिप्पणी (आंगनबाड़ी महिला वहीं जो पति को छोड़ आए) के बाद शायद पहली बार मुख्यमंत्री सह बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक परेशान दिखाई दिए थे। उन्हें बुलाकर आंगनबाड़ी की महिलाओं से माफी मांगने तक को कह दिया। दामोदर राउत को माफीनामा का वीडियो तक जारी करना पड़ा। बीजद का कांग्रेस के साथ गठजोड़ वाले बयान पर पटनायक को बार-बार सफाई देना पड़ा था। जबकि भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी रखने का बयान जब नवीन पहले भी दे चुके थे। फिर गठजोड़ की संभावना का बयान दामोदर क्यों दे रहे हैं, यह बात शायद नवीन बाबू भी नहीं समझ पा रहे हैं। राउत की जुबान फिसलना नई बात नहीं है। आबकारी मंत्री के पद पर रहने के दौरान उन्होंने सुप्रीमकोर्ट के निर्णय पर भी प्रतिकूल टिप्पणी करके सरकार को मुसीबत में डाल दिया था। हाईवे से 500 मीटर दूर शराब की दुकानों ले जाने के फैसले पर राउत ने साफ कहा कि यह ओडिशा में संभव ही नहीं है। इसके बाद उनका विभाग बदल दिया गया था। एक बार अपनी ही पार्टी के तीन नेताओं को भूत कहकर चर्चा में आए दामोदर राउत ने सफाई में कहा था कि मुख्यमंत्री ने जब उनसे गाड़ी में बैठने को कहा तो गाड़ी में तीन नेता देवाशीष सामंतराय, प्रताप जेना एवं विष्णु दास पहले से बैठे हुए थे। इन्हें देख कर मैं डर गया और इन्हें भूत समझ लिया। राउत के किस्से तो बीजू पटनायक की सरकार के जमाने से चर्चित रहे हैं। सन 1990 में सुंदरगढ़ की सभा का बसंती बेहरा का किस्सा आज भी लोगों को याद है। तब बीजू कैबिनेट में मंत्री थे। पंचायत चुनाव में निर्वाचित महिला को लेकर काफी चर्चा में रहे। 23 दिसंबर 2017 को ब्राह्माणों को भिखारी तक कह दिया था। बोले, भीख आदिवासी नहीं ब्राह्माण मांगते हैं। पटनायक ने सफाई में कहा था कि किसी भी जाति, नस्ल या धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले किसी व्यक्ति को मैं नामंजूर करता हूं। उस समय दामोदर राउत को मंत्री परिषद से हटा दिया गया। दामोदर राउत पर अब ओमफेड और सहकारिता विभाग में करोड़ों के घोटाले का आरोप खुलकर लगा रहे हैं।

Posted By: Jagran