जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : विगत नौ सितंबर को अनुगुल जिले के आठ मलिक में हुई बस दुघर्टना मामले में बस मालिक की गिरफ्तारी के विरोध में गुरुवार को करीब 18 हजार निजी बसों के पहिए थम गए। इस गिरफ्तारी का विरोध करते हुए ओडिशा बस मालिक संघ ने हड़ताल का आह्वान किया था। जिसके प्रतिवाद में निजी बसों के मालिकों ने अपनी- अपनी बसें सड़कों पर नहीं उतारीं। इसका सबसे ज्यादा असर आमजनों पर पड़ा। लोगों को गंतव्य तक जाने में काफी परेशानी हुई। सबसे ज्यादा असर दूसरे प्रांतों से आने वालों को हुआ क्योंकि उन्हें इस हड़ताल के संबंध में जानकारी भी नहीं थी।

हर दिन कटक- भुवनेश्वर- पुरी, भुवनेश्वर-खुर्दा, भुवनेश्वर- नयागड़ व बरहमपुर यातायात करने वाले यात्रियों को खासतौर से विशेष दिक्कत हुई। जानकारी के मुताबिक ओडिशा बस मालिक संघ के आह्वान पर गुरुवार को सुबह छह बजे से शुक्रवार की सुबह छह बजे तक बसों को सड़क पर नहीं उतरने का निर्णय लिया गया था। इसी के तहत गुरुवार को करीब 18 हजार बसें सड़क पर नहीं उतरीं। संघ ने चेतावनी दी है कि है यदि बस मालिक को रिहा नहीं किया गया तो सात अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। जानकारी के मुताबिक विगत नौ सितंबर को आठमलिक माणित्री ब्रिज पर दुर्घटना का शिकार हुई बस के मालिक ऋषभ त्रिपाठी की गिरफ्तारी का प्रतिवाद कर 26 सितंबर को बस मालिक संघ के कार्यकर्ताओं ने काला बिल्ला लगाया था। यहा तक कि संघ के सदस्य परिवहन मंत्री रमेश माझी से भी मुलाकात कर गिरफ्तारी का प्रतिवाद किए थे। उस समय मंत्री ने कहा था कि आठमलिक दुर्घटना में बस मालिक को एमवीआइ एक्ट में गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस संबंध में गृह विभाग के साथ चर्चा कर उचित कदम उठाया जाएगा। इस दौरान तीन दिन का समय निकल जाने के बावजूद जब किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई तो बस मालिक संघ ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया। विदित हो कि ओडिशा में सरकारी बसों की संख्या काफी कम है। जिसकी वजह से अधिकतर रूटों पर निजी बसें संचालित होती हैं। इससे हड़ताल के कारण ज्यादा परेशानी हुई। खासकर भुवनेश्वर- बरमुंडा बस स्टैंड, कटक- बादामबाड़ी बस स्टैंड एवं पुरी बस स्टैंड सहित अन्य जगहों पर यात्रियों की परेशानी साफ दिख रही थी।

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