भुवनेश्वर, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ओडिशा में फणि तूफान से हुई तबाही का जायजा लिया। पीएम ने तूफान से प्रभावित ओडिशा के इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। पीएम मोदी ने इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की जमकर तारीफ की। मुख्यमंत्री भी इस दौरान उनके साथ मौजूद थे। लोकसभा चुनाव के दौरान दूसरे दल के मुख्यमंत्री की तारीफ के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। इसकी कुछ खास वजह भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच संचार बहुत अच्छा था। मैं निगरानी भी कर रहा था। ओडिशा के लोग जिस तरह से सरकार के हर निर्देश का अनुपालन करते हैं, वह सराहनीय है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले 381 करोड़ रुपये की घोषणा की थी, अब 1000 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। इसके बाद ओडिशा के प्रभावित इलाकों की समीक्षा के लिए पीएम मोदी ने ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक भी की।

पीएमओ सूत्रों ने बताया कि पीएम मोदी ओडिशा की तरह पश्चिम बंगाल में भी चक्रवाती तूफान के बाद उत्पन्न स्थिति के लिए समीक्षा बैठक करना चाहते थे, इसके लिए वहां की सरकार को पत्र भी लिखा गया। लेकिन राज्य सरकार ने जवाब में कहा कि सरकारी अधिकारी चुनाव ड्यूटी में बिजी हैं, इसलिए समीक्षा बैठक नहीं हो सकती।

इससे पहले एयरपोर्ट पर राज्यपाल गणेशी लाल, सीएम नवीन पटनायक और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी का स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने इससे पहले प्रदेश के राज्यपाल गणेशी लाल और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया था और केंद्र की ओर से राज्य सरकार को पूरी मदद का आश्वासन दिया था। उन्होंने प्रदेश के लोगों तूफान से बहादुरी के साथ मुकाबला करने के लिए धन्यवाद भी दिया था।

भाजपा के लिए केवल फायदे का सौदा
फणि तूफान से तबाह ओडिशा के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्‍य के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक की सोमवार को जमकर तारीफ की। मोदी की इस दरियादिली के जानकार कुछ और मायने भी निकाल रहे हैं। उनके अनुसार, चूंकि राज्‍य की सभी 21 लोकसभा सीटों के चुनाव हो चुके हैं, ऐसे में भाजपा को अब इस तरह के बयान की कोई राजनीतिक कीमत नहीं चुकानी होगी। अलबत्‍ता, संसदीय चुनाव के बाद केंद्र में सरकार बनाने के लिए भाजपा को अगर कुछ सांसदों की जरूरत पड़ती है तो नवीन बाबू से अच्‍छे संबंध उनके काम आ सकते हैं।

यही कारण है कि मोदी ने राज्‍य में हुए नुकसान का जायजा लेने में भी समय नहीं गंवाया और खुद वहां जाकर राहत पैकेज का ऐलान भी किया। इतना ही नहीं पीएम के इस रुख का मतलब तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर रेड्डी और आंध्र के प्रमुख नेता जगन रेड्डी जैसे विपक्षी नेताओं को सकारात्‍मक मैसेज देना भी है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे भी उनके काम आ सकें। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर राज्‍य में हुई तबाही के मद्देनजर 381 करोड़ रुपए के तुरंत राहत पैकेज का ऐलान करते हुए बाद में 1000 करोड़ रुपए और देने का भी आश्‍वासन दिया। 

फणि से पुरी व खुर्दा सर्वाधिक तबाह, राहत को युद्धस्तर पर कार्य
विनाशकारी तूफान फणि के गुजर जाने के 36 घंटे बाद भी राज्य के प्रभावित इलाकों मे व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। पुरी व खुर्दा जिले सर्वाधिक प्रभावित हैं। यहां बिजली-पानी व खाद्य सामग्री का संकट अभी भी बना हुआ है। उधर मृतकों की संख्या 39 तक पहुंच जाने की सूचना है। हालांकि मुख्य सचिव ने 29 लोगों के ही मरने की पुष्टि की है। धार्मिक नगरी पुरी में ही 21 लोगों की जान चली गई है।

11 जिले प्रभावित
तूफान से राज्य के 11 जिले प्रभावित हुए हैं। पुरी व खुर्दा पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। अभी भी बिजली, पानी और खाने के सामान की आपूर्ति सुचारू ढंग से शुरू नहीं हो पाई है। राज्य सरकार ने कहा, हालात को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। तूफान से 10 हजार गांव व 52 शहरी इलाके प्रभावित हुए हैं और करीब एक करोड़ की आबादी इसकी चपेट में आई है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उम्मीद जताई है कि बहुत जल्द पुरी व भुवनेश्वर में बिजली-पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से होने लगेगी। रविवार को उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में अगले 15 दिनों तक सरकार लोगों को भोजन मुहैया कराएगी।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने सर्वाधिक प्रभावित पुरी व खुर्दा जिलों के पीडि़त परिवारों को एक महीने का राशन का चावल व एक हजार रुपये के साथ पालिथीन शीट देने की घोषणा की है। इससे कम प्रभावित कटक, केंद्रपाड़ा व जगतसिंहपुर जिलों में हर परिवार को एक महीने का चावल देने के साथ पांच सौ रुपये नकद दिए जाएंगे। सरकार ने जिन लोगों के मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, उन्हें प्रति मकान 95 हजार एक सौ रुपये देने की घोषणा की है। आंशिक रूप में गिरे मकानों के एवज में 52 हजार रुपए व मामूली रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के एवज में 32 सौ रुपये दिए जाएंगे। फसल एवं पालतू पशुओं के नष्ट होने पर क्षतिपूर्ति देने की घोषणा की गई है।

सीएम ने किया हवाई मार्ग से दौरा
पुरी रेलवे स्टेशन को 10 मई तक के लिए बंद कर दिया गया है। प्रभावित इलाकों में बिजली और दूर संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप होने से जनजीवन पूरी तरह से ठप पड़ गया है। इस बीच मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हवाई मार्ग से प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन करने के बाद रविवार को राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने राहत व बचाव कार्य की निगरानी करने के लिए चार अधिकारियों की टीम को विशेष दायित्व सौंपा है। एनडीआरएफ, ओड्राफ, अग्निशमन विभाग के साथ विभिन्न सेवाभावी संगठनों से जुड़े लोग राहत कार्य में जुटे हैं। अस्पतालों में बिजली नहीं होने के कारण घायलों के इलाज तथा आपरेशन में परेशानी हो रही है।

हवाई सेवा बहाल, स्पेशल ट्रेनें चलाई गई
हवाई सेवा बहाल होने के साथ ही भुवनेश्वर से ट्रेनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। इधर, पूर्व तट रेलवे के सूत्रों के अनुसार तूफान के कारण भुवनेश्वर, पुरी व खुर्दा रेलवे स्टेशनों को भारी नुकसान हुआ है जिनकी मरम्मत का कार्य धीरे-धीरे चल रहा है। वहीं, दक्षिण पूर्व रेलवे के सूत्रों के अनुसार हावड़ा से भुवनेश्वर होते हुए तीन स्पेशल ट्रेनों हावड़ा-यशवंतपुर, हावड़ा-वास्कोडिगामा और हावड़ा चेन्नई सेंट्रल का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा अन्य ट्रेने पहले की तरह रद रहेंगी। सूत्रों ने बताया कि आठ मई के बाद रेल सेवा सुचारू हो सकेगी।

फणि के चलते श्रीमंदिर को पहुंची आंशिक क्षति
ओडिशा के पुरी जिले में स्थित 21वीं सदी के ऐतिहासिक श्रीमंदिर अर्थात भगवान जगन्नाथ के मंदिर का एक हिस्से को शुक्रवार को आए फणि तूफान के प्रभाव से आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। लेकिन मंदिर की मुख्य इमारत को कोई नुकसान नहीं हुआ है। यह जानकारी मंदिर के मुख्य प्रशासक पीके महापात्रा ने दी है। उन्होंने बताया कि हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से आग्रह करेंगे कि वह क्षतिग्रस्त ढांचे का मुआयना करे।

उन्होंने बताया कि श्रीमंदिर के सिंहद्वार को जय- विजय द्वार के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर दोनों ओर प्रतिमाएं हैं। वास्तव में इन्हें ही जय-विजय कहा जाता है। इनमें से जय को आंशिक रूप से क्षति पहंुची है जबकि विजय पूरी तरह से सुरक्षित है। यह स्थान मंदिर का अतिपवित्र स्थान माना जाता है। जिस समय फणि तूफान ने 200 से 240 किमी की रफ्तार से पुरी के समुद्र तट का छुआ, उस समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा मंदिर में रिपेयरिंग का काम किया जा रहा था।

इसके लिए करीब पांच हजार लोहे का पाइप लगाया गया है। जिनमें से अधिकांश तूफानी हवाओं के चलते जमीन पर गिर गए। इन्हीं के कारण सिंहद्वार पर लगी जय नामक प्रतिमा को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद शनिवार को श्रद्धालुओं का प्रवेश कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। रविवार को राहत दे दी गई।

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Sachin Mishra

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस