शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। मजबूत इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है यह कहावत आज पवित्र साहू के साथ सटिक बैठ रही है, जिन्होंने तमाम बाधाओं को दूर करते हुए एसएसबी द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा को पास कर ली है। उन्हें अब प्रतिष्ठित सरकारी कालेज में लेक्चरर (व्याख्याता) के लिए चयन किया गया है। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के मार्शाघाइ प्रखंड अंतर्गत अखुआ ओडंगा गांव के मूल निवासी पवित्र साहू ने राज्य चयन बोर्ड (एसएसबी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा को सफलतापूर्वक पास किया है और अब वह एक सरकारी कॉलेज में व्याख्याता के पद के लिए चयनित किए गए हैं।

पवित्र की पढ़ाई के लिए परिवार के पास नहीं थे पैसे

 अपनी अविश्वसनीय यात्रा की कहानी को साझा करते हुए पवित्र ने कहा है कि कैसे उन्होंने अपनी पढ़ाई की फीस देने और अपने परिवार को चलाने के लिए मजदूर के रूप में काम किया था। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता ने मेरी प्राथमिक शिक्षा के लिए बहुत मेहनत की। मेरे पिता ने खेत में काम कर बारहवीं तक की मेरी पढ़ाई करवायी। हालांकि, इसके बाद उन्होंने मेरी पढ़ाई के लिए आगे भुगतान करने में असमर्थता व्यक्त की। फिर मैं तमिलनाडु के चेन्नई शहर चला गया और एक चित्रकार के रूप में काम किया। हालांकि, इस दौरान मैंने व्याख्याता बनने के खुद के और अपने परिवार के सपने को कभी नहीं भूला।

काफी संघर्ष करते हुए पवित्र ने हासिल की पीएचडी की डिग्री

मैंने अखुआ ओदांग सरकारी हाई स्कूल से मैट्रिक और प्लस 2 तथा केंद्रापड़ा स्वायत्त कॉलेज से प्लस 3 की पढ़ाई पूरी की। बाद में भुवनेश्वर चला आया और उत्कल विश्वविद्यालय से एमए, एमफिल और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। 

बेटे की पढ़ाई के लिए पिता खेत में करते थे मजदूरी

पवित्र की मां झरना साहू ने कहा कि घर चलाने एवं बेटे की पढ़ाई पूरी हो जाए इसके लिए उसके पिता खेत में मजदूरी करते थे। जब भी हम पवित्र को कहते थे कि अब उसकी पढ़ाई के लिए पैसे देना हमारे बस में नहीं है, तो वह रोने लगता था। अपनी बेबसी पर हमें भी बड़ा रोना। भगवान ने आज उसका सपना पूरा कर दिया है।

आखिरकार पवित्र का सपना हुआ पूरा 

पवित्र के पिता किशोर चंद्र साहू ने कहा है कि जब परिणाम घोषित होने के बाद जब वह चयन होने के खबर हमें आकर दी, तो हमारी आंखों से आंसू छलक आए। हमने गांव में मिठाइयां बांटी। पवित्र की चाची बनिता साहू ने कहा कि मेरे भतीजे ने बहुत संघर्ष करते हुए भुवनेश्वर में अपनी पढ़ाई जारी रखी। हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब उसने यह खुशखबरी साझा की कि उसे नौकरी मिल गई।

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Edited By: Arijita Sen

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