भुवनेश्वर, जेएनएन। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा के ऊपर सक्रिय रहने से भारी बारिश होने की संभावना है। 28 अगस्त, मंगलवार सुबह तक कालाहांडी, कंधमाल, कोरापुट, गंजाम, बरगढ़, केंदुझर, संबलपुर, देवगढ़ आदि जिलों में भारी बारिश होने की चेतावनी मौसम विभाग की ओर से दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, इस समय के दौरान समुद्र अशांत रहेगा और तेज हवा भी चलेगी। ऐसे में मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है। इधर, कम दबाव के प्रभाव से हो रही बारिश के चलते महानदी एवं इसकी शाखा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। आगामी 24 घंटे तक पश्चिम ओडिशा में भारी बारिश होगी। इससे महानदी के साथ अन्य शाखा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है। इससे सतर्क रहने को मौसम विभाग ने परामर्श दिया है।

मौसम वैज्ञानिक प्रो. सुरेन्द्र नाथ पशुपालक के मुताबिक, कम दबाव के क्षेत्र का प्रभाव वर्तमान में ओडिशा में बना हुआ है। इसका प्रभाव छत्तीसगढ़ पहुंचने के बाद पश्चिम दिशा की तरफ आगे बढ़ेगा। इसके प्रभाव से केंद्रीय एवं पश्चिमी ओडिशा में बारिश होगी। 28 अगस्त को बारिश कम हो जाएगी। हालांकि उन्होंने कहा है कि 31 अगस्त को ओडिशा के ऊपर और एक कम दबाव का क्षेत्र बनेगा। इससे आगामी दो दिन तक केंद्रीय एवं उत्तर ओडिशा के अधिकांश जगहों पर बारिश होगी।

पश्चिमी ओडिशा में अगले 24 घंटों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई। भारतीय मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में प्रवेश न करने की भी सलाह दी है।  

गौरतलब है कि पुरी के समुद्र तट पर एक बार फिर समुद्री लहरों से खतरा उत्पन्न होने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। पुरी-कोणार्क मार्ग पर लहरों से काफी नुकसान पहुंचा है। रविवार को पूíणमा के दिन समुद्र के अशांत होने और अधिक लहरों की संभावना को देखते हुए तटीय क्षेत्र के लोगों में भय का माहौल बना रहा। उधर, प्रशासन की टीम ने तटीय इलाके का दौरा कर लहरों से नुकसान का जायजा लिया।

पिछले कुछ दिनों से ओडिशा में समुद्री लहरों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। लहरें अब तटीय इलाके में बनी सड़क के पास तक पहुंच गई हैं। इससे करीब 300 फीट की चौड़ाई में तट का बालू बहकर समुद्र में जा चुका है। इससे पुरी के समुद्र तट पर स्थित सड़क पर खतरा मंडराने लगा है। पिछले साल भी समुद्री लहरों ने बालू का बहाव कर तटीय इलाके में कोहराम मचाया था। 21 अगस्त को ही एक विशेषज्ञों की एक टीम ने समुद्री लहरों के इस व्यवहार का जायजा लिया था। मगर तब इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया मान लिया गया। इसके बाद अब नई दिल्ली से एक उच्चस्तरीय टीम को बुलाने की बात चल रही है जो समस्या के जड़ तक जाकर इसके स्थाई निदान का उपाय सुझाएगी।