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ओडिशा में भी UCC लागू करने की तैयारी, SC के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनी कमेटी तैयार करेगी मसौदा

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:57 AM (IST)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद ओडिशा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. केंद्रीय गृह मंत्री के बयान के बाद ओडिशा में यूसीसी प्रक्रिया शुरू।

  2. विधि विभाग नोडल, विशेषज्ञ समिति यूसीसी का मसौदा तैयार करेगी।

  3. विवाह, तलाक, संपत्ति में समान नियम; जनजातीय समुदायों पर चुनौती।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वर्ष 2029 तक 21 भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के बयान के बाद ओडिशा में भी इसे लागू करने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, यूसीसी लागू करने के लिए राज्य का विधि विभाग नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों, सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों, संवैधानिक प्रावधानों, उत्तराखंड में लागू यूसीसी कानून और उसमें किए गए संशोधनों के साथ-साथ अन्य राज्यों में तैयार मसौदा कानूनों का अध्ययन कर ओडिशा के लिए एक अलग प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए सबसे पहले एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा।

विधि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पांच से छह सदस्यीय यह समिति ओडिशा में यूसीसी लागू करने की रूपरेखा तैयार करेगी। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जा सकती है।

इसके अलावा इसमें हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, एक समाजसेवी तथा विधि विभाग के एक अधिकारी को शामिल किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकार समिति के सदस्यों की संख्या बढ़ा भी सकती है।

समिति का मुख्य उद्देश्य “एक राज्य, एक कानून” की अवधारणा को लागू करने के लिए सुझाव और सिफारिशें देना होगा। विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद ही यूसीसी लागू करने की वास्तविक प्रक्रिया शुरू होगी।

विवाह, तलाक और भरण-पोषण के लिए होंगे समान नियम

यूसीसी लागू होने पर राज्य में किसी भी धर्म के व्यक्ति को विवाह के लिए एक समान कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। विभिन्न धर्मों के अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानून लागू होगा।

इसके तहत कोई भी व्यक्ति एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेगा। पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी पर रोक होगी। तलाक के मामलों में भी सभी धर्मों के लिए समान नियम लागू होंगे। तलाक की कानूनी प्रक्रिया, आधार और उसके बाद मिलने वाले अधिकारों के लिए एक ही कानून प्रभावी रहेगा।

भरण-पोषण (मेंटेनेंस) के मामलों में भी सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था होगी। इसके साथ ही विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाया जाएगा ताकि कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

संपत्ति और उत्तराधिकार में महिलाओं को समान अधिकार

वर्तमान में विभिन्न धर्मों के अनुसार उत्तराधिकार संबंधी अलग-अलग कानून लागू हैं, लेकिन यूसीसी लागू होने पर घर, जमीन, कृषि भूमि, पैतृक संपत्ति और अन्य संपत्तियों के उत्तराधिकार के लिए एक समान नियम लागू होगा।

इसके तहत पुत्र और पुत्री को समान अधिकार प्राप्त होंगे। पति-पत्नी दोनों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा। दत्तक ग्रहण (गोद लेने) की प्रक्रिया भी एक समान होगी और जैविक तथा दत्तक संतान के अधिकारों में कोई भेदभाव नहीं रहेगा।

लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी हो सकता है अनिवार्य

ओडिशा में फिलहाल लिव-इन रिलेशनशिप की परंपरा बहुत अधिक प्रचलित नहीं है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ऐसे संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है।

लिव-इन संबंध समाप्त करने के लिए भी कानूनी प्रक्रिया निर्धारित होगी। ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को भी कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे। इसके अलावा धर्म आधारित विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत कर एक समान नियम लागू किया जाएगा।

जनजातीय समुदाय को लेकर सरकार के सामने बड़ी चुनौती

ओडिशा में यूसीसी लागू करने के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि जनजातीय समुदायों को इसके दायरे में रखा जाए या नहीं।

उत्तराखंड में कुल आबादी का लगभग 2.9 प्रतिशत जनजातीय समुदाय है और उन्हें यूसीसी से बाहर रखा गया है। वहीं ओडिशा में जनजातीय आबादी कुल जनसंख्या का 22.85 प्रतिशत यानी लगभग 95.91 लाख है। राज्य में 13 पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) सहित कुल 62 जनजातीय समुदाय निवास करते हैं।

इन समुदायों की परंपराएं, सामाजिक व्यवस्थाएं और उत्तराधिकार संबंधी नियम अलग-अलग हैं। विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में इनके अपने पारंपरिक कानून लागू होते हैं। ऐसे में सरकार इनके लिए अलग व्यवस्था करेगी, यूसीसी से छूट देगी या समान कानून लागू करेगी, यह भविष्य में स्पष्ट होगा।

यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी?

विधि विभाग के अनुसार, सबसे पहले विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। इसके बाद यूसीसी का मसौदा तैयार होगा और जनता से सुझाव मांगे जाएंगे। फिर इसे राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा। सदन में चर्चा और पारित होने के बाद इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए अग्रेषित करेंगे। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही यूसीसी राज्य में लागू हो सकेगी।

उल्लेखनीय है कि फिलहाल केवल भाजपा शासित उत्तराखंड में यूसीसी लागू है। जबकि असम, मध्य प्रदेश और गुजरात में इससे संबंधित विधेयक विधानसभा से पारित हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है।

ऐसे में ओडिशा में यूसीसी लागू करने की समयसीमा और विशेषज्ञ समिति के गठन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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