Student Union Election: बीजद राज में बंद छात्रसंघ चुनाव बीजेपी सरकार में बहाल; ओडिशा में तेज हुई छात्र राजनीति
ओडिशा के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नौ साल बाद 15 अक्टूबर को छात्रसंघ चुनाव होंगे, जिसकी घोषणा उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने की है।
HighLights
ओडिशा में नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की वापसी।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने 15 अक्टूबर की तारीख घोषित की।
बीजेपी सरकार ने पूर्ववर्ती बीजेडी सरकार का फैसला पलटा।
जासं, भुवनेश्वर। ओडिशा के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लगभग नौ वर्षों के बाद एक बार फिर लोकतांत्रिक हलचल लौटने जा रही है।
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि आगामी 15 अक्टूबर को प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव (स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन) कराए जाएंगे।
वहीं, 16 अक्टूबर को नवनिर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। इस घोषणा के सामने आते ही राज्य भर के कैंपस में चुनावी सरगर्मी अचानक तेज हो गई है।
7 को अधिसूचना और 9 अक्टूबर को नामांकन
उच्च शिक्षा मंत्री ने चुनाव के मुख्य शेड्यूल की जानकारी देते हुए बताया कि 7 अक्टूबर को चुनाव संबंधी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
इसके बाद 9 अक्टूबर को इच्छुक उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग जल्द ही इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और आचार संहिता की गाइडलाइंस जारी करेगा।
मंत्री ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक मूल्य स्थापित करने और युवाओं के भीतर कुशल नेतृत्व क्षमता विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है, जिससे भविष्य के जनप्रतिनिधि तैयार होते हैं।
पूर्ववर्ती सरकार के फैसले को पलटा
उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती बीजू जनता दल (बीजेडी) सरकार ने वर्ष 2017 से राज्य के परिसरों में छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगा दी थी।
अब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार ने विद्यार्थियों की वर्षों पुरानी मांग और लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए इसे पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है।
सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस कदम से उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की भागीदारी और जवाबदेही बढ़ेगी।
कैंपस में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
चुनाव की तिथि तय होते ही राजधानी भुवनेश्वर समेत पूरे ओडिशा के शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच गई हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), छात्र बीजद और कांग्रेस समर्थित छात्र संगठनों (एनएसयूआई) ने अपनी-अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं।
9 साल से चुनाव न होने के कारण पुराने संगठन के सामने नए चेहरे तलाशने की चुनौती है। इसके अतिरिक्त, एआईएसएफ, डीएसओ और एसएफआई जैसे वामपंथी छात्र संगठन भी छात्र हितों के मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में ताल ठोकने की पूरी तैयारी कर रहे हैं।
उत्कल यूनिवर्सिटी बनी छात्र राजनीति का केंद्र
राज्य में छात्र राजनीति का मुख्य केंद्र माने जाने वाले उत्कल विश्वविद्यालय में सबसे अधिक चहल-पहल देखी जा रही है। 10 अक्टूबर से शुरू होने वाली प्रथम वर्ष की कक्षाओं को देखते हुए सभी प्रमुख छात्र संगठनों ने नए विद्यार्थियों के स्वागत और सहायता के लिए हेल्प डेस्क लगाने की योजना बनाई है।
इसके अलावा बीजेबी स्वायत्त महाविद्यालय, राजधानी महाविद्यालय, देवराय डिग्री महाविद्यालय, बेसिक साइंस कॉलेज और महर्षि कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थानों में भी बैठकों का दौर जारी है।
राजनीतिक दलों की भी टिकी निगाहें
सूत्रों के मुताबिक, मुख्य राजनीतिक दलों के मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता भी अपने-अपने छात्र पंखों को मजबूत करने में जुट गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि छात्र राजनीति से ही भविष्य के बड़े नेता निकलते हैं, इसलिए करीब एक दशक बाद हो रहे इन चुनावों पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की पैनी नजर रहेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों की पुनः शुरुआत केवल एक चुनावी प्रक्रिया की वापसी नहीं है।
बल्कि यह युवाओं को लोकतंत्र, जिम्मेदारी और नेतृत्व का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने का एक नया अध्याय है। हमारा संकल्प है कि आज की युवा शक्ति को कल के जिम्मेदार नेतृत्व में परिवर्तित किया जाए।
