OMG! ₹19300 के लिए बहन का कंकाल कंधे पर उठाकर बैंक पहुंचा शख्स, ओडिशा का वीडियो वायरल
ओडिशा के केंदुझर में एक आदिवासी युवक को अपनी मृत बहन का कंकाल कंधे पर लादकर बैंक जाना पड़ा, क्योंकि ...और पढ़ें

श्मशान से खोदना पड़ा बहन का शव

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संतोष कुमार पांडेय, अनुगुल। ओडिशा के केंदुझर जिले में व्यवस्था की संवेदनहीनता का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। जिले के पाटना ब्लॉक में महज 19,300 रुपये निकालने के लिए एक गरीब आदिवासी युवक को अपनी मृत बहन का कंकाल कंधे पर उठाकर बैंक तक पहुंचना पड़ा। यह घटना न केवल बैंकिंग प्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि गरीबों की बेबसी की भी दर्दनाक तस्वीर पेश करती है।
मिली जानकारी के अनुसार, डिआनाली गांव निवासी जितु मुंडा सोमवार को मल्लीपसी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक शाखा पहुंचे थे। उनकी बहन कलरा मुंडा का दो महीने पहले निधन हो चुका था और खाते में जमा 19,300 रुपये ही परिवार के लिए जीवनयापन का सहारा थे। जितु ने खुद को बहन का एकमात्र वारिस बताते हुए रकम निकालने की गुहार लगाई।
उत्तराधिकार प्रमाणपत्र लाने को कहा
आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने खाताधारक की अनुपस्थिति में भुगतान से इनकार कर दिया और उत्तराधिकार प्रमाणपत्र लाने को कहा। आर्थिक तंगी और असहायता से जूझ रहे जितु इस जवाब से इतने आहत हुए कि सीधे श्मशान घाट पहुंच गए। वहां दफनाई गई बहन के कंकाल को बाहर निकालकर करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर बैंक ले आए।
बैंक परिसर में कंकाल रखकर उन्होंने अधिकारियों से कहा कि “अब खाताधारक खुद आ गई है, पैसे दे दीजिए।” यह दृश्य देख वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। कुछ ही देर में भीड़ जुट गई और माहौल गमगीन हो उठा।
कंकाल को दोबारा श्मशान ले जाकर दफनाया
घटना की सूचना मिलते ही पाटना थाने की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने हताश और आक्रोशित जितु मुंडा को समझा-बुझाकर शांत कराया तथा उन्हें आश्वासन दिया कि उनके हक के पैसे दिलाने में पूरी मदद की जाएगी। अधिकारियों की मौजूदगी में बहन कलरा मुंडा के कंकाल को दोबारा श्मशान ले जाकर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दफनाया गया।
समाधान की प्रक्रिया शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आया। पाटना के बीडीओ मानस दंडपत ने कहा कि मामला पहले उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन जानकारी मिलते ही समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नियमों के दायरे में रहते हुए जल्द से जल्द जितु मुंडा को उनकी बहन के खाते में जमा करीब 20 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाए।
बैंक सूत्रों के अनुसार, कलरा मुंडा के खाते में नामित व्यक्ति (नॉमिनी) की भी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में जितु मुंडा ही एकमात्र जीवित दावेदार हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हुई। अब नियमानुसार उनकी दावेदारी स्थापित कर राशि देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
भाई जितु ही उनका एकमात्र सहारा
बताया जाता है कि मृतका कलरा मुंडा के पति और इकलौते बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी। ऐसे में भाई जितु ही उनका एकमात्र सहारा था। अब वही परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
यह घटना बैंकिंग नियमों में मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या महज 19 हजार रुपये के लिए किसी को ऐसी भयावह स्थिति से गुजरना पड़ेगा? केंदुझर की यह घटना सिस्टम पर करारा तमाचा है, जो सुधार की मांग कर रही है।
