जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : अब ओडिशा में भी अन्य राज्यों की तरह विधान परिषद होगी। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य विधान परिषद के गठन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पाढ़ी ने उक्त जानकारी मीडिया को दी। इसी के साथ राज्य में विधान परिषद के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया। विधान परिषद का गठन 49 सदस्यों को लेकर किया जाएगा। आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में इस प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए पेश किया जाएगा।

राज्य में पहली बार विधान परिषद गठन प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर संसदीय व्यापार मंत्री विक्रम केशरी आरूख ने कहा है कि राज्य में विधान परिषद गठन के लिए सात जनवरी 2015 को परिवहन मंत्री डा.नृ¨सह साहू के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने विभिन्न राज्यों का दौरा किया और विभिन्न राज्यों में विधान परिषद गठन की प्रक्रिया एवं कार्य की समीक्षा करने के साथ तथ्यों का संग्रह किया था। उन्होंने कहा कि कमेटी ने कर्नाटक, बिहार, महाराष्ट्र एवं तेलेंगाना राज्य का भी दौरा कर तमाम जानकारी हासिल की थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य में विधान परिषद का गठन होने से उत्तम शासन व्यवस्था देने के साथ वैधानिक चर्चा में भी यह सहायक होगी। कैबिनेट की बैठक में कमेटी की रिपोर्ट पेश किया गया।

भारतीय संविधान की धारा 161 (1) के अनुसार विधान परिषद गठन करने के लिए विधानसभा में संकल्प पास होना जाना जरूरी है। ऐसे में विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में राज्य विधान परिषद गठन के लिए संकल्प पेश किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में इस आशय का भी निर्णय लिया गया। विधान परिषद के सदस्य को विधानसभा सदस्य की तरह ही तमाम सुविधाएं मिलेंगी। इस पर 35 करोड़ रुपया खर्च होगा। फिलहाल विधान परिषद की बैठक और कार्य पुराने विधानसभा भवन में ही संपन्न होगा।

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क¨लग साथी ऋण योजना और सरल :

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में विधान परिषद गठन के प्रस्ताव के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय भी लिया गया। मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पाढ़ी ने बताया कि उच्च शिक्षा के लिए दिए जा रहे क¨लग साथी ऋण को और अधिक सरल बना दिया गया है। सभी प्रोफेसनल कोर्स के लिए सर्वाधिक 10 लाख रुपये तक ऋण दिया जाएगा और ऋण भुगतान करने की अवधि को बढ़ाकर 15 साल कर दी गई है। इसी तरह ओडिशा-बिहार तीर्थ स्थल कानून 1920 खत्म कर दिया गया है, जिसकी अब कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है। इसके अलावा ओडिशा आबकारी सेवा नियम 2002 में संशोधन कर सभी 31 आबकारी अधीक्षक के पदों को आबकारी सेवा अधिकारी की पदोन्नति के आधार पर भरा जाएगा। ओडिशा रूल ऑफ विजिलेंस में संशोधन कर सभी सरकारी कार्य में वैट के बदले जीएसटी को कार्यकारी करने के लिए भी कैबिनेट ने निर्णय लिया है।

Posted By: Jagran