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ओडिशा: अब एक ही सरकारी गाड़ी से चलेंगे 2-3 अधिकारी, लंबी दूरी की यात्रा के लिए बस-ट्रेन के इस्तेमाल की सलाह

Published: Fri, 12 Jun 2026 09:31 PM (IST)

ओडिशा सरकार ने ईंधन बचत के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के स्वतंत्र सरकारी वाहनों पर रोक लगा दी है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. वरिष्ठ अधिकारियों के स्वतंत्र सरकारी वाहनों पर रोक लगाई गई।

  2. केवल विशेष सचिव और ऊपर के अधिकारियों को स्वतंत्र वाहन।

  3. अन्य अधिकारी साझा वाहन व्यवस्था का करेंगे उपयोग।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण बढ़ती ईंधन एवं ऊर्जा चुनौतियों के बीच ओडिशा सरकार ने सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर बड़ा फैसला लिया है।

राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों को मिलने वाले स्वतंत्र सरकारी वाहनों की सुविधा सीमित कर दी है। अब केवल विशेष सचिव (स्पेशल सेक्रेटरी) और उससे ऊपर के अधिकारियों को ही स्वतंत्र सरकारी वाहन मिलेगा।

वित्त विभाग की ओर से गुरुवार को जारी आदेश के अनुसार, एक जून 2026 या उसके बाद अतिरिक्त सचिव (एडिशनल सेक्रेटरी) पद पर पदोन्नत होने वाले अधिकारियों को सरकारी वाहन साझा (पूल) व्यवस्था के तहत इस्तेमाल करना होगा। ऐसे अधिकारी अतिरिक्त सचिव पद पर तीन वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद ही स्वतंत्र वाहन पाने के पात्र होंगे।

हालांकि, जिन अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को 31 मई 2026 तक स्वतंत्र सरकारी वाहन आवंटित किया जा चुका है, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा। वे पहले की तरह वाहन सुविधा का लाभ लेते रहेंगे।

एक वाहन से चलेंगे दो-तीन अधिकारी

सरकार ने अवर सचिव से संयुक्त सचिव स्तर तक के अधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों के लिए भी पूल वाहन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। निर्देश में कहा गया है कि एक सरकारी वाहन का उपयोग कम से कम दो से तीन अधिकारी मिलकर करेंगे।

वित्त विभाग के अनुसार, पूल वाहन का उपयोग करने वाले अधिकारियों के वेतन से प्रति माह 1680 रुपये की कटौती की जाएगी। यह राशि सभी अधिकारियों के लिए समान होगी।

सरकार ने अधिकारियों को राज्य के भीतर लंबी दूरी की सरकारी यात्राओं के दौरान यथासंभव बस और ट्रेन जैसे सार्वजनिक परिवहन साधनों का उपयोग करने की भी सलाह दी है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ये निर्देश राज्य सरकार के उपक्रमों, स्वायत्त संस्थानों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न सोसायटियों पर भी लागू होंगे।

सरकार का मानना है कि इस कदम से ईंधन की बचत होगी और सरकारी खर्च में कमी आएगी। वहीं, इसे ऊर्जा संकट के बीच संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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