विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बच्चों को 'आलसी' या 'जिद्दी' कहा तो खैर नहीं! छात्रों की मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए ओडिशा सरकार ने जारी की SOP

Published: Wed, 07 Oct 2026 01:52 PM (IST)

ओडिशा सरकार ने बच्चों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और अवसाद को रोकने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।

छात्रों की मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए ओडिशा सरकार ने जारी की SOP (AI Generated Image)

छात्रों की मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए ओडिशा सरकार ने जारी की SOP (AI Generated Image)

HighLights

  1. शिक्षकों को बच्चों के साथ अपमानजनक शब्दों के प्रयोग पर रोक।

  2. छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु विस्तृत एसओपी जारी।

  3. उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित होंगे।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बच्चों और युवाओं में बढ़ती मानसिक तनाव, अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति को लेकर राज्य सरकार गंभीर हो गई है। आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार ने विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।

नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों और कर्मचारियों को बच्चों के साथ व्यवहार में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है। किसी भी बच्चे को 'आलसी', 'जिद्दी' या अन्य अपमानजनक शब्दों से संबोधित करने पर रोक लगाई गई है।

सरकार का मानना है कि बच्चों के व्यवहार में दिखाई देने वाली कई असामान्यताएं मानसिक दबाव और तनाव का परिणाम होती हैं। कई मामलों में यह स्थिति गंभीर होकर आत्मघाती प्रवृत्ति तक पहुंच जाती है।

इसे देखते हुए जारी एसओपी में बच्चों के साथ सकारात्मक और आश्वस्त करने वाली भाषा के उपयोग पर जोर दिया गया है। शिक्षकों को सार्वजनिक रूप से किसी छात्र को अपमानित नहीं करने तथा उसके मन में हीन भावना पैदा करने वाले शब्दों से बचने को कहा गया है।

एसओपी के अनुसार यदि किसी बच्चे में लगातार उदासी, भय, चिड़चिड़ापन, हिंसक व्यवहार या अन्य असामान्य लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक दिखाई देते हैं तो उसे गंभीर संकेत माना जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें परामर्श, सहायता, निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों के पास रेफर करने की व्यवस्था की गई है।

बच्चों की मानसिक स्थिति के आधार पर उन्हें ग्रीन, येलो और रेड श्रेणी में बांटा जाएगा और उसी अनुरूप देखभाल सुनिश्चित की जाएगी।

परीक्षा के दबाव को कम करने के लिए 25 मिनट की पढ़ाई के बाद पांच मिनट का विश्राम, गहरी सांस लेने का अभ्यास और नियमित नींद की आदत विकसित करने की सलाह दी गई है।

विश्वविद्यालयों के लिए भी गाइडलाइन जारी

वहीं, विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए रैगिंग, भेदभाव, नशाखोरी, घर से दूर रहने की परेशानी और संबंधों में असफलता जैसी चुनौतियों से निपटने हेतु प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की गई है।

राज्य सरकार की ओर से तैयार 'ऑपरेशनल गाइडलाइंस ऑन मेंटल हेल्थ एंड वेल-बीइंग ऑफ चिल्ड्रेन, एडोलसेंट्स एंड यंग एडल्ट्स' रिपोर्ट के आधार पर यह एसओपी जारी की गई है।

सरकार को उम्मीद है कि इससे बच्चों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकेगा और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा।