Odisha DGP Controversy: एक्स-कैडर पद और 8 नामों की सूची पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फैसला रखा सुरक्षित
ओडिशा डीजीपी नियुक्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा। कोर्ट ने एक्स-कैडर पद सृजन और ...और पढ़ें

8 अक्टूबर को झारखंड में डीजीपी नियुक्ति से जुड़े समान मामले की सुनवाई होनी है।
HighLights
अदालत ने एक्स-कैडर पद सृजन पर राज्य सरकार से सवाल पूछे।
यूपीएससी की सिफारिशों के बावजूद अतिरिक्त नाम जोड़ने पर आपत्ति।
जासं, भुवनेश्वर। ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
आगामी 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में झारखंड के डीजीपी चयन से जुड़े समान मामले की सुनवाई होनी है। चूंकि दोनों याचिकाओं की कानूनी प्रकृति एक जैसी है।
इसलिए संभावना जताई जा रही है कि झारखंड मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ओडिशा डीजीपी नियुक्ति पर भी अपना अंतिम निर्णय सुना सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के दो तीखे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मुख्य रूप से प्रकाश सिंह दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर ध्यान केंद्रित किया। अदालत ने राज्य सरकार से दो प्रमुख प्रश्नों पर स्पष्टीकरण मांगा:
- चयन प्रक्रिया के बीच में एक्स-कैडर (Ex-cadre) पद सृजित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- जब यूपीएससी (UPSC) ने नियमनुसार कैडर के तीन योग्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों की सिफारिश कर दी थी, तो उनमें से किसी एक को चुनने के बजाय अतिरिक्त नाम क्यों जोड़े गए?
राज्य सरकार का पक्ष और दलील
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने सरकार के कदम का बचाव किया।
सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि चयन के लिए एक अधिक व्यापक विकल्प (लार्जर पूल) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया था।
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और प्रकाश सिंह मामले में तय मानकों का पूरी तरह पालन किया है।
क्या है पूरा विवाद?
नियमों के मुताबिक, डीजीपी चयन के लिए राज्य सरकार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजती है।
यूपीएससी समीक्षा के बाद तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल राज्य को भेजता है, जिसमें से एक को डीजीपी नियुक्त किया जाता है।
इस मामले में भी यूपीएससी ने तीन आईपीएस अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी। हालांकि, राज्य सरकार ने उन तीन नामों में से किसी एक को चुनने के बजाय अचानक एक एक्स-कैडर पद सृजित कर दिया और यूपीएससी को आठ अधिकारियों की एक नई सूची भेज दी।
प्रक्रिया में इस बदलाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर अब सभी की निगाहें अदालत के आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
