भुवनेश्वर, शेषनाथ राय। धार्मिक एवं पारंपरिक रीति रिवाज से अलग हटकर ओडिशा के गंजाम जिले में एक जोड़े ने भारतीय संविधान की शपथ लेकर एक दूसरे को अपना जीवन साथी चुना है। शादी में ना ही बाजा बजा और ना ही आतिशबाजी करते हुए झांकी में दूल्हे को मंडप तक लाया गया। इतना ही नहीं ना ही लगन के लिए पत्रा देखा गया और ना ही किसी प्रकार का दहेज या कोई कर्मकांड हुआ। दूल्हा-दुल्हन एक दूसरे को वरमाला पहनाकर सात जन्मों तक साथ निभाने की शपथ लेकर विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। इसके साथ ही विवाह उत्सव के दौरान रक्तदान शिविर आयोजित कर पूरे समाज के लिए एक उदाहरण पेश करते हुए दोनों ने रक्तदान कर अपने वैवाहिक जीवन का शुभारंभ किया है। न्यारे ढंग से हुई इस शादी का गवाह संविधान को बनाया गया था। 

यह अनूठी शादी ओडिशा के गंजाम जिला अन्तर्गत बरहमपुर में हुई है। इस नए दंपत्ति का नाम विप्लव कुमार एवं अनीता पात्र है। बरहमपुर के कमापल्ली स्थित वैदनाथेश्वर मंदिर के कल्याण मंडप में यह अनूठी शादी सम्पन्न हुई है। 

समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, फिजूल खर्च तथा कुसंस्कार को खत्म करने के लिए फुलवाणी के विप्लव एवं बरहमपुर गोइलूण्डी के अनीता दोनों ने आपसी सहमति से मंदिर में इस अनूठे ढंग से शादी करने का निर्णय लिया था। शादी में बिना वजह के पैसे न खर्च कर समाज के लिए कुछ करने के उद्देश्य से ही इस नए दंपत्ति ने शादी समारोह में रक्तदान शिविर आयोजित किया। इसके साथ ही शादी समारोह में फैले कुछ अंध विश्वास एवं कुसंस्कार को खत्म करने का चिंतन किया था। 

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मानवतावादी हिंदू संगठन की मदद से शादी के दिन आयोजित इस रक्तदान शिविर में रक्तदान करने के बाद एक विधवा महिला के हाथ से वरमाला लेकर विप्लव एवं अनीता ने एक दूसरे को पहनाए और सात जन्म के लिए एक दूसरे के हो गए। समाज में फैले अंधविश्वास तथा कुसंस्कार को खत्म करने के उद्देश्य से सम्पन्न हुई यह अनूठी शादी निश्चित रूप से आगामी दिनों में युवा वर्ग के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी।

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Posted By: Babita kashyap

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