विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चक्रवात 'अर्णब' पर भारी पड़ी ओडिशा की तैयारी, शून्य जनहानि; शेल्टर होम में 43 हजार से अधिक सुरक्षित

Published: Thu, 29 Oct 2026 10:50 AM (IST)

ओडिशा ने चक्रवात अर्णब के दौरान प्रभावी तैयारी और प्रबंधन के कारण शून्य जनहानि का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया है। ...और पढ़ें

चक्रवात अर्णब पर भारी पड़ी ओडिशा की तैयारी

चक्रवात अर्णब पर भारी पड़ी ओडिशा की तैयारी

HighLights

  1. चक्रवात अर्णब में ओडिशा ने शून्य जनहानि का लक्ष्य हासिल किया।

  2. 43,827 लोगों को 634 आश्रय स्थलों में सुरक्षित पहुंचाया गया।

  3. सभी 19,143 मछुआरे समुद्र से सुरक्षित तट पर लौटे।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। चक्रवात अर्णब के दौरान ओडिशा में शून्य जनहानि का लक्ष्य हासिल करने में सफलता मिली है। अब तक किसी की मृत्यु की सूचना नहीं है। महाप्रभु श्री जगन्नाथ के आशीर्वाद और राज्य सरकार व जिला प्रशासन की तैयारियों से चक्रवात का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया गया है। 

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार शाम विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) के कंट्रोल रूम में चक्रवात की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा के बाद यह जानकारी दी।

अमित शाह से कई बार फोन पर बातचीत

मुख्यमंत्री ने कहा कि चक्रवात से पहले और उसके दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे कई बार फोन पर बातचीत कर तैयारियों की जानकारी ली थी। ओडिशा सरकार आंध्र प्रदेश सरकार के भी लगातार संपर्क में थी। उन्होंने कहा कि राज्य और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क था, जिसके कारण प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सका।

आठ जिलों में 634 आश्रय स्थल सक्रिय

मुख्यमंत्री ने बताया कि चक्रवात से प्रभावित आठ जिलों के 634 आश्रय स्थलों में 43,827 लोगों को सुरक्षित रखा गया है। इनमें मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगड़ा, कालाहांडी, गंजाम, गजपति और नुआपड़ा शामिल हैं। राहत शिविरों में लोगों के लिए पका हुआ भोजन, सूखा राशन, पेयजल, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की गई है।

WhatsApp Image 2026-10-29 at 10.14.53 AM

चक्रवात से निपटने के लिए कुल 313 राहत एवं बचाव टीमें तैनात की गई हैं। इनमें ओड्राफ की 60, एनडीआरएफ की नौ और अग्निशमन सेवा की 244 टीमें शामिल हैं। इसके अलावा दो उपमुख्यमंत्रियों, छह मंत्रियों और सात आइएएस अधिकारियों को विभिन्न जिलों की निगरानी का दायित्व सौंपा गया था।

गजपति में बारिश का सर्वाधिक प्रभाव

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के 17 ब्लाकों में 105 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है। कोरापुट जिले के पोटांगी में सर्वाधिक 188 मिलीमीटर और गजपति जिले के मोहना में 182.4 मिलीमीटर बारिश हुई। बारिश से गजपति जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कोरापुट के प्रभारी उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव, गजपति के प्रभारी मंत्री सूर्यवंशी सूरज और मलकानगिरी के प्रभारी मंत्री नित्यानंद गोंड से फोन पर बातचीत की। उन्होंने बारिश, संभावित नुकसान, नदियों के जलस्तर और राहत शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

2,245 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित पहुंचाया

मुख्यमंत्री ने बताया कि चक्रवात के दौरान 2,245 गर्भवती महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया। इस अवधि में 931 बच्चों का जन्म हुआ है। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने समय रहते आवश्यक कदम उठाए।

19,143 नौकाओं से समुद्र में गए सभी मछुआरे लौटे

चक्रवात को देखते हुए समुद्र में गए मछुआरों को सुरक्षित वापस लाने के लिए विशेष कदम उठाए गए। गंजाम से बालेश्वर तक तटीय क्षेत्रों से 19,143 नौकाओं में मछुआरे समुद्र में गए थे। मुख्यमंत्री के अनुसार, सभी मछुआरे सुरक्षित तट पर लौट आए हैं। उन्हें वापस लाने में सरकार को शत-प्रतिशत सफलता मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चक्रवात का खतरा कम होने के बावजूद प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए पर्याप्त पंपों की व्यवस्था कर पानी निकालने के निर्देश दिए गए हैं।

समीक्षा बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. अरविंद पाढ़ी और एसआरसी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

यह भी पढ़ें- ओडिशा में चक्रवात 'अर्णब' के खतरे के बीच 2245 गर्भवती महिलाओें का रेस्क्यू, 931 प्रसव सुरक्षित