महानदी जल विवाद का नहीं निकल रहा समाधान, मछुआरों की रोजी-रोटी पर संकट
महानदी जल विवाद का स्थायी समाधान न होने से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच तनाव बना हुआ है। कलमा बैराज ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, ब्रजराजनगर। वर्षों बीत जाने के बावजूद महानदी जल विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच चल रहे जल बंटवारे के विवाद का सीधा असर अब सीमांत क्षेत्रों के लोगों की आजीविका पर पड़ने लगा है। विशेषकर महानदी पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निर्मित कलमा बैराज के कारण ओडिशा सीमा से लगे क्षेत्रों के मछुआरा परिवार गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कलमा बैराज में पानी रोके जाने के कारण महानदी के निचले हिस्सों तक पर्याप्त जल नहीं पहुंच पा रहा है। इससे नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है और मछलियों का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। वर्षों से नदी पर निर्भर रहकर जीवनयापन करने वाले मछुआरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मछुआरों का कहना है कि पहले महानदी में पर्याप्त पानी रहने से विभिन्न प्रजातियों की मछलियां मिल जाती थीं, लेकिन अब नदी सूखने की स्थिति में पहुंच रही है। इसके चलते मछली पकड़ने का काम लगभग ठप हो गया है। आमदनी घटने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है और कई परिवार रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
इधर, महानदी जल विवाद को लेकर दोनों राज्यों के बीच लगातार चर्चा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। सीमांत क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहने के बजाय नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जल संरक्षण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
स्थानीय संगठनों और बुद्धिजीवियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में महानदी तटवर्ती क्षेत्रों में जल संकट और आजीविका की समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है।
