भुवनेश्वर, जेएनएन। सावन माह की अंतिम सोमवारी के मौके पर राजधानी स्थित महाप्रभु श्र्रींलगराज व

पुरी के श्रीलोकनाथ मंदिर समेत राज्य के  तमाम शिवालयों में शिव भक्तों का बड़ा हुजूम नजर आया। श्र्रींलगराज मंदिर मेंजल चढ़ाने करने के लिए ज्यादातर लोग कटक के गड़गड़िया घाट से जल लेकर

रविवार की रात में ही पहुंच गए थे। भोर में कतारबद्ध होकर महाप्रभु को जल अर्पित किया।

कांवरियों की भीड़ की देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कटक से लेकर भुवनेश्वर तक सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए थे। इस मार्ग पर रात भर कांवरियों का आना जाना लगा रहा। शिव भक्तों की सेवा के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने जगह-जगह शिविर लगाया था। भोले बाबा के भजनों के बीच भक्तों के विश्राम, भोजन व कांवर रखने का उचित प्रबंध किया गया था। लिंगराज मंदिर में भक्तों को कतार के जरिए एक एक जल चढ़ाने भेजा जा रहा था। वहीं, पुरी के श्रीलोकनाथ मंदिर में भी कांवरियों खासी भीड़ रही। राज्य के विभिन्न नदियों से जल लेकर करीब 17 हजार कांवरियों का जत्था वहां पहुंचा। श्रीलोकनाथ देव ट्रस्ट बोर्ड के मैनेजर अपच्छ परिड़ा के अनुसार रविवार शाम से ही भक्त कतार में लग गए थे।  

गड़गड़िया घाट से जल ले लिंगराज पहुंचे किन्नर

महानदी के गड़गड़िया घाट से सोमवार को करीब तीन सौ से अधिक किन्नरों का एक जत्था कांवर में जल लेकर भुवनेश्वर स्थित लिंगराज मंदिर पहुंचे और भोले बाबा को जल चढ़ाया। इससे पूर्व इस जत्थे में गड़गड़िया घाट पर महानदी के पवित्र जल में डुबकी लगाई और तट पर रेत से शिवलिंग बनाकर पूजा अर्चना करने के बाद कीर्तन करते हुए लिंगराज मंदिर के लिए प्रस्थान किया। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि पवित्र सावन माह में महादेव को जल चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

Posted By: Babita