जेएनएन, भुवनेश्वर : राजधानी भुवनेश्वर समेत पूरे राज्य में उत्साह के साथ मंगलवार को काíतक पूíणमा एवं बोइत बंदान उत्सव मनाया गया। नगर में बड़े आकार में कुआखाई नदी तट, दयानदी, विदुसागर एवं कटक में महानदी तट में हजारों की संख्या में लोगों ने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र स्नान कर दीप जलाकर नाव को नदी में प्रवाहित किया। आ का मा बोई, पान गुआ थोई। पान गोई तोर मास क धर्म मोर लोकगीत गाकर लोगों ने नाव को नदी में प्रवाहित किया। अर्थात इसी दिन ओडिशा के साधव व्यापारी बाली सुमात्रा आदि द्वीपों की यात्रा आरंभ करते थे, जिनको विदाई के तौर पर पान पत्ता, सुपारी आदि जहाज में रखकर पानी में उतारा जाता था, उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सदियों से काíतक पूर्णिमा के दिन नाव बहाई जाती है जिसे बोइट बंदान पर्व कहा जाता है।

हालंाकि इसी बीच रायगड़ा जिले से दो अलग अलग जगह हादसा होने से दो युवकों की जान चली गई। बताया गया है कि बंशधारा नदी एवं नागावली नदी में डूब जाने से दो युवकों की मौत हो गई है। गुमुड़ा के पास बंशधारा नदी में डूबकर मरने वाले युवक की पहचान 16 वर्षीय संतोष जेना के रूप में हुई है। जबकि नागावली नदी में मरने वाले युवक का नाम सुमन बेहरा और उसकी उम्र 22 साल बतायी गई है।

राजधानी भुवनेश्वर में कुआखाई नदी तट पर सामाजिक संगठन सहारा जनमंच की तरफ से सामूहिक बोइत बंदान उत्सव आयोजित किया। इसका उद्घाटन क्षेत्रिय सांसद अपराजिता षाड़ंगी, राज्यसभा सांसद डॉ. रघुनाथ महापात्र, भाजपा के प्रवक्ता गोलक महापात्र ने किया। अन्य अतिथियों में ट्रैफिक एसपी सागरिका नाथ, पाला ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ छोटराय प्रमुख उपस्थित थे। इस मौके पर अतिथियों ने बालुका शिल्पी यतीन दास द्वारा निíमत बालुका कला का उद्घाटन करने समेत नदी में नाव प्रवाहित कर उत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर सांसद अपराजिता षाडंगी ने कहा कि अपनी परंपरा को बचाए रखना बड़ी बात है। हमें अपनी परंपरा एवं संस्कृति बचाए रखना होगा और अपने बच्चों को इसके महत्व के बारे में समझाना होगा। उन्हें बताना होगा कि आखिर यह पर्व क्यों मनाया जाता है। सांसद ने अपनी तरफ से हर संभव मदद करने का आश्वासन भी संस्थान को दिया। बोईत बंदान उत्सव को लेकरकुआखाई नदी घाट पर प्रशासन की तरफ से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

इस मौके पर जनमंच की तरफ से विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए 11 लोगों को सम्मानित किया गया। राज्य सरकार के संस्कृति विभाग के सहयोग से सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। समारोह में जनमंच के सचिव ज्ञानानंद सागर, एकादशी बेहरा, कमलेश प्रमुख मौजूद थे। अंत में संस्था के अध्यक्ष सहदेव तराई ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

Posted By: Jagran

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