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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारतीय तटरक्षक बल ने बढ़ाया देश का गौरव, समुद्र के बीच फंसे घायल म्यांमार नाविक को बचाया

By Jagran NewsEdited By: Yashodhan Sharma
Published: Tue, 24 Jan 2023 08:56 AM (IST)

Myanmar Sailor Rescue म्यांमार के एक नाविक को बचाव अभियान के तहत भारतीय तटरक्षक बल ने बचाया। म्यांमार का एक ...और पढ़ें

म्यांमार के एक नाविक को बचाव अभियान के तहत भारतीय तटरक्षक बल ने बचाया।
म्यांमार के एक नाविक को बचाव अभियान के तहत भारतीय तटरक्षक बल ने बचाया।

अनुगुल/भुवनेश्वर जागरण संवाददाता। म्यांमार के एक नाविक को बचाव अभियान के तहत भारतीय तटरक्षक बल ने बचाया। सोमवार सुबह भुवनेश्वर के एक अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया। दरअसल, तटरक्षक बल को सूचना मिली कि म्यांमार का एक नाविक बंगाल की खाड़ी में मध्य समुद्र में फंस गया है और उसे बचाने के लिए एक बचाव अभियान शुरू किया।

पहली बार लंबी दूरी के लिए हल्के हेलीकॉप्टर की ली मदद

भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (बीपीआईए) में तैनात नवीनतम हल्के तटरक्षक हेलीकॉप्टर के साथ बचाव अभियान चलाया गया। यह पहली बार था जब स्वदेश निर्मित हल्के हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल लंबी दूरी के बचाव अभियान में किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार थान हत्जेके ल्विन के रूप में पहचाने गए म्यांमार के नागरिक को एमटी जीबी वेंचर पर जहाज से बचाया गया था, जो सिंगापुर से होते हुए सागर द्वीप के पास पहुंचा था। सूत्रों के अनुसार ,भारतीय तटरक्षक बल को सागर वीटीएमएस से सोमवार सुबह एमटी जीबी वेंचर पर चालक दल के एक म्यान्मारी नाविक के घायल होने के बारे में इनपुट मिला।

तटरक्षक बल ने विस्तृत मूल्यांकन और चर्चा के बाद, घायल नाविक की स्थिति गंभीर होने का आकलन किया गया, जिसे चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता थी। बाद में, तटरक्षक दल ने सोमवार सुबह 8.55 बजे एक चिकित्सीय बचाव अभियान शुरू किया और भुवनेश्वर से 300 किलोमीटर दूर जहाज पर पहुंच का राहत व बचाव कार्य शुरू करते हुए मरीज को जहाज से एयरलिफ्ट कर लिया गया तथा उसे भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बंगाल की खाड़ी के रास्ते हल्दिया जा रहा था टैंकर जहाज

यांत्रिक विफलता के कारण टैंकर जहाज सागर के दक्षिण में लगभग 40.5 समुद्री मील की दूरी पर रुका हुआ था। सिंगापुर-ध्वज पोत एमटी जीबी वेंचर के बचाए गए चालक दल के सदस्य की पहचान थान हत्जेके ल्विन के रूप में की गई है। बोर्ड पर एक हाइड्रोलिक पाइपलाइन की ओर जाते समय ल्विन को स्पष्ट रूप से अपने पेट में कुंद आघात का सामना करना पड़ा। उन्होंने तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की। यह महसूस करते हुए कि जहाज पर ल्विन का इलाज नहीं किया जा सकता, पोत के मास्टर ने तट रक्षक से सहायता मांगी।

एक अधिकारी के अनुसार यह पता चला कि जहाज पारादीप, ओडिशा के पूर्व उत्तर पूर्व में लगभग 80 समुद्री मील की दूरी पर स्थित था। हल्दिया में हमारे चिकित्सा अधिकारी ने तुरंत मास्टर से संपर्क किया और मरीज को स्थिर करने के लिए आवश्यक प्राथमिक उपचार की सलाह दी।"

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में दो तटरक्षक जहाजों को भी टैंकर के स्थान पर ले जाया गया था ताकि हवाई निकासी मुश्किल हो जाने की स्थिति में मदद की जा सके। वर्षों से, अपने आदर्श वाक्य 'वी प्रोटेक्ट' के अनुसार, भारतीय तट रक्षक ने समुद्र में हजारों लोगों की जान बचाई है और बीमार या घायल नाविकों के सैकड़ों चिकित्सा निकासी किए हैं।

इस तरह हुआ रेस्क्यू

जानकारी के अनुसार एक रासायनिक टैंकर में विंडलैस वेसल के हाइड्रोलिक तेल के प्रभाव में आने के कारण उक्त नाविक का पेट जल गया था। भारतीय तटरक्षक ने एक बयान में कहा, "भुवनेश्वर से पहली बार स्वदेशी उन्नत हल्के हेलीकाप्टर ने समुद्र से एक बहुत लंबी दूरी की चिकित्सा निकासी की है।" “हमें आपातकालीन MEDEVAC के लिए आज सुबह लगभग 8.30 बजे एक संदेश मिला।

जैसा कि हमारे विमान को खोज और बचाव अभियान के लिए तैयार रखा गया है, हमने सुबह 9 बजे उड़ान भरी। भारतीय तटरक्षक बल के एक अधिकारी अमित श्रीवास्तव ने कहा, हमारा विमान सुबह 10.10 बजे व्यापारी जहाज के पास पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया और मरीज को बचाया।