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1737 के कोलकाता तूफान से लेकर 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन तक, जब समंदर ने बरपाया था कहर

Published: Tue, 27 Oct 2026 07:43 PM (IST)

यह लेख भारत के विनाशकारी चक्रवातों के इतिहास पर प्रकाश डालता है, जिसमें 1737 के कोलकाता महाचक्रवात से लेकर 1999 ...और पढ़ें

जब भारत में समंदर ने बरपाया था कहर (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

जब भारत में समंदर ने बरपाया था कहर (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. 1999 ओडिशा महाचक्रवात ने 9,887 लोगों की जान ली थी।

  2. 1737 कोलकाता चक्रवात में 30 हजार से अधिक मौतें हुईं।

  3. भारत के तटीय क्षेत्रों के लिए चक्रवात बड़ी चुनौती।

शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में उठने वाले चक्रवातों का नाम सुनते ही वर्ष 1999 के ओडिशा महाचक्रवात की भयावह तस्वीर सामने आ जाती है। इस महातूफान ने राज्य में ऐसी तबाही मचाई थी कि उसके घाव आज भी लोगों की स्मृतियों में ताजा हैं। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में 9,887 लोगों की जान गई थी। हालांकि, भारत का चक्रवात इतिहास केवल 1999 की त्रासदी तक सीमित नहीं है। 

देश ने इससे पहले भी कई ऐसे विनाशकारी तूफानों का सामना किया है, जिनमें लाखों लोगों की मौत होने का अनुमान है। वर्ष 1839 के कोरिंगा चक्रवात से लेकर 1970 के भोला चक्रवात तक, इन आपदाओं ने तटीय क्षेत्रों में व्यापक तबाही मचाई थी।

1737 का कोलकाता महाचक्रवात

भारत के इतिहास के विनाशकारी चक्रवातों में 1737 का कोलकाता महाचक्रवात का उल्लेख किया जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों में इस तूफान के कारण 30 हजार से अधिक लोगों की मौत होने का दावा किया जाता है।

1839 का कोरिंगा महाचक्रवात

आंध्र प्रदेश के कोरिंगा तटीय क्षेत्र में आए इस चक्रवात को भारत की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है। इस तूफान में तीन लाख से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया जाता है। तटीय क्षेत्र में हजारों जहाजों के नष्ट होने की बात भी कही जाती है।

1864 का कोलकाता चक्रवात

इस चक्रवात ने व्यापक तबाही मचाई थी। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इसमें लगभग 30 हजार लोगों की मौत हुई थी और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।

1970 का भोला चक्रवात

तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान, वर्तमान बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल को प्रभावित करने वाला यह तूफान दुनिया के सबसे घातक उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में शामिल है। इसमें लगभग तीन लाख लोगों की मौत होने का अनुमान है। यह उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में आए सबसे विनाशकारी चक्रवातों में से एक था।

1999 का ओडिशा महाचक्रवात

अक्टूबर 1999 में आए इस महातूफान ने ओडिशा के तटीय जिलों में भारी तबाही मचाई थी। तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और समुद्र में उठी ऊंची लहरों ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 9,887 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद राज्य में आपदा प्रबंधन और चक्रवात से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

2019 का चक्रवात फणि

मई 2019 में आए फणि ने पुरी सहित ओडिशा के कई जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया था। इसे अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा गया था। तेज हवाओं ने बिजली और संचार व्यवस्था के साथ-साथ घरों, पेड़ों और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया था।

2020 का चक्रवात अम्फान 

बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न अम्फान ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश को प्रभावित किया था। पश्चिम बंगाल में इसने व्यापक तबाही मचाई। आर्थिक नुकसान के लिहाज से इसे उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के प्रमुख विनाशकारी चक्रवातों में गिना जाता है।

2020 के निसर्ग, निवार और बुरेवी

अरब सागर में आए निसर्ग ने महाराष्ट्र और गुजरात को प्रभावित किया था। वहीं, निवार ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में भारी बारिश और जलभराव की स्थिति पैदा की। दिसंबर में आए बुरेवी से तमिलनाडु और केरल के कई हिस्सों में खराब मौसम का असर देखने को मिला।

2021 का चक्रवात ताउते 

अरब सागर में उत्पन्न ताउते ने केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया था। मानसून पूर्व अवधि में आए इस तूफान ने व्यापक नुकसान पहुंचाया।

इन ऐतिहासिक घटनाओं से स्पष्ट है कि भारत के तटीय क्षेत्रों के लिए चक्रवात हमेशा बड़ी चुनौती रहे हैं। हालांकि, पूर्व चेतावनी प्रणाली, समय पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और बेहतर आपदा प्रबंधन के कारण अब ऐसी आपदाओं में जनहानि कम करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

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