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रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग: HAL ने तैयार किया 2000वां एयरो इंजन, राजनाथ सिंह ने दी 'शक्ति' की नई सौगात

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:58 PM (IST)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एचएएल कोरापुट में 2000वें एयरो इंजन की आपूर्ति और शक्ति हेलीकॉप्टर इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन का शुभारंभ किया।

रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग: HAL ने तैयार किया 2000वां एयरो इंजन, राजनाथ सिंह ने दी 'शक्ति' की नई सौगात

रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग: HAL ने तैयार किया 2000वां एयरो इंजन, राजनाथ सिंह ने दी 'शक्ति' की नई सौगात

HighLights

  1. रक्षा मंत्री ने एचएएल कोरापुट में 2000वें एयरो इंजन का शुभारंभ किया।

  2. शक्ति हेलीकॉप्टर इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन भी शुरू की गई।

  3. यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ओडिशा के कोरापुट जिले के सुनाबेड़ा स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का दौरा कर एचएएल कोरापुट द्वारा निर्मित 2000वें एयरो इंजन की आपूर्ति और शक्ति हेलीकॉप्टर इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि 2000वें एयरो इंजन की आपूर्ति केवल एक औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, तकनीशियनों और कर्मचारियों की कई पीढ़ियों की मेहनत और समर्पण छिपा है। यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगी।

राजनाथ सिंह ने कहा कि एचएएल कोरापुट ने देश के लिए मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों के इंजन तैयार किए हैं। इसके साथ ही यहां 9,000 से अधिक इंजनों का ओवरहॉल किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सैन्य तैयारियों में इंजन निर्माण जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही महत्वपूर्ण उनके रखरखाव और ओवरहॉल की क्षमता भी होती है।

रक्षा मंत्री ने एयरो इंजन तकनीक को आधुनिक इंजीनियरिंग का सबसे जटिल क्षेत्र बताते हुए कहा कि इसमें उन्नत धातुकर्म, अत्यधिक सटीक विनिर्माण, परीक्षण, कूलिंग तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण जैसी उच्च स्तरीय तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उच्च-थ्रस्ट इंजन है। यदि भारत को एएमसीए को पूरी तरह स्वदेशी बनाना है तो स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने कहा कि एचएएल कोरापुट में इंजीनियरों द्वारा विकसित की जा रही तकनीकी विशेषज्ञता भविष्य में इस लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने उच्च-थ्रस्ट इंजन क्षमता विकसित करने के लिए चल रहे कार्यों का अवलोकन किया है और प्रगति से बेहद संतुष्ट हैं। लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से चल रहे प्रयास देश के रक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाई देने वाले हैं। उन्होंने मिधानी (एमआईडीएचएएनआई) के सहयोग से कच्चे माल के स्वदेशीकरण की पहल को भी महत्वपूर्ण बताया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की पहली स्वदेशी उच्च-थ्रस्ट इंजन परीक्षण सुविधा की स्थापना की दिशा में हो रहा कार्य आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देगा। इससे न केवल विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश की रणनीतिक और रक्षा क्षमताएं भी मजबूत होंगी।

इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। एचएएल कोरापुट की उपलब्धियां न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में कोरापुट भारत की रक्षा उत्पादन श्रृंखला में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उल्लेखनीय है कि शक्ति इंजन उत्पादन कार्यक्रम लगभग 218 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जा रहा है। यह इंजन भारतीय सैन्य हेलीकॉप्टरों की रीढ़ माना जाता है और इसे एचएएल तथा फ्रांस की सफ्रान हेलीकॉप्टर इंजिन्स के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है।

नई उत्पादन लाइन शुरू होने से हेलीकॉप्टर इंजनों के निर्माण की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा सशस्त्र बलों की जरूरतों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा।