ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: 26 साल से जेल में बंद दारा सिंह की रिहाई पर सस्पेंस, SC ने ओडिशा सरकार को दिया अल्टीमेटम
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सजा समीक्षा बोर्ड को ग्राहम स्टेंस हत्याकांड के दोषी दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई की याचिका पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

26 साल से जेल में बंद दारा सिंह की रिहाई पर सस्पेंस, SC ने ओडिशा सरकार को दिया अल्टीमेटम
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई पर फैसला मांगा।
ओडिशा सजा समीक्षा बोर्ड को 2 सितंबर तक निर्णय लेने का निर्देश।
दोषी दारा सिंह ने आजीवन कारावास के 26 साल पूरे किए।
एजेंसी, पटना: 1999 के ग्राहम स्टेंस हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड को उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने पाल की याचिका पर फैसला लेने में हो रही देरी पर कड़ी आपत्ति जताई है। दारा सिंह अपनी आजीवन कारावास की सजा के 26 साल से अधिक पूरे कर चुका है।
अदालत ने कहा कि इस मामले को 2 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करें। सजा समीक्षा बोर्ड एक निर्णय ले और हमें अवगत कराए। आप फैसला लें; अन्यथा, हम लेंगे। हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते कि कोई निर्णय न लिया जाए।
अदालत को यह सूचित किया गया था कि जब पिछली बार इस मामले की सुनवाई स्थगित की गई थी, तब सजा समीक्षा बोर्ड पाल की याचिका पर विचार करने की प्रक्रिया में था। हालांकि, अदालत ने गौर किया कि बोर्ड का कोई भी निर्णय उसके समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
प्रतिवादी ओडिशा राज्य की ओर से पेश वकील ने अदालत के सामने जेल निदेशालय का एक पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया था कि क्योंझर की जिला जेल से एक रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है।
सुप्रीम कोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड को निर्देश दिया कि वह एक निर्णय ले और 2 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक अदालत को उसके परिणाम से अवगत कराए।
दारा सिंह को जनवरी 1999 में ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों, फिलिप और टिमोथी की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। ओडिशा के मनोहरपुर गांव में इन तीनों को उनकी स्टेशन वैगन (गाड़ी) के अंदर जिंदा जला दिया गया था।
साल 2003 में एक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने पाल को मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2005 में उड़ीसा उच्च न्यायालय ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में उसकी उम्रकैद की सजा को यह कहते हुए बरकरार रखा था कि यह मामला "दुर्लभ से दुर्लभ" की श्रेणी में नहीं आता है, जिसके लिए मृत्युदंड दिया जाए।
इसके अलावा, दारा सिंह को ओडिशा में मुस्लिम व्यापारी शेख रहमान और ईसाई पादरी अरुल दास की हत्या के अलग-अलग मामलों में भी दोषी ठहराया गया था।
