जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : राज्य में मंगलवार से सरकारी बस कर्मचारियों के तीन दिवसीय हड़ताल पर चले जाने से परिवहन सेवा बुरी तरह प्रभावित हो गई। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

अपनी चार सूत्री मांग को लेकर निखिल ओडिशा परिवहन कर्मचारी संघ ने तीन दिवसीय हड़ताल के तहत सरकारी बस सेवा ठप कर दी है। इससे राज्य में सरकारी बसों के पहिए थम गए। हड़ताल से राज्य में करीब 600 बसें सड़क से गायब हो गई हैं। इसका सीधा असर सड़क परिवहन पर पड़ा है। पहले दिन की हड़ताल से लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

कोरापुट जिला के जयपुर जोन में सरकारी बस सेवा बंद का व्यापक असर देखने को मिला है। हड़ताल के कारण जयपुर जोन में 60 सरकारी बसें विभिन्न बस स्टैंडों पर खड़ी हो गई हैं। प्रदेश के सबसे बड़े बस अड्डे कटक के बादामबाड़ी से भी सरकारी बसों का आवागमन बंद है। इसका असर खासकर उन इलाकों में ज्यादा हुआ है जहां केवल सरकारी बसें ही लोगों के यातायात का एकमात्र साधन हैं। उन इलाकों में लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।

कर्मचारी संघ ने समान काम के लिए समान वेतन, अस्थाई कर्मचारियों को स्थायी नियुक्ति, कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के मुताबिक वेतन देने, कर्मचारियों पर गैरकानूनी कार्रवाई बंद करने जैसी मांग को लेकर हड़ताल पर जाने का पहले ही एलान कर दिया था। लेकिन उसके मुकाबले प्रशासन ने किसी तरह की तैयारी नहीं की जिससे आम लोग की परेशानी और बढ़ गई हैं।

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