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हाथी मेरा साथी: ओडिशा में 'राजू' हाथी बना सिरिड़ गांव का लाडला, दरवाजे पर आकर खाता है फल

By Kamal BishwasEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Mon, 05 Oct 2026 06:30 PM (IST)

ओडिशा के संबलपुर जिले के सिरिड़ गांव में एक जंगली हाथी 'राजू' ग्रामीणों के लिए डर का नहीं, बल्कि स्नेह ...और पढ़ें

करीब छह महीने पहले यह हाथी देवगढ़ जिले के बारकोट के घने जंगलों से भटककर बामड़ा आया था।

करीब छह महीने पहले यह हाथी देवगढ़ जिले के बारकोट के घने जंगलों से भटककर बामड़ा आया था।

HighLights

  1. ओडिशा के सिरिड़ गांव में जंगली हाथी 'राजू' का अनोखा प्रेम।

  2. ग्रामीणों द्वारा 'राजू' को फल खिलाना, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक।

  3. वन विभाग द्वारा हाथी और ग्रामीणों की सुरक्षा पर लगातार निगरानी।

संसू, बामडा (ओडिशा)। आमतौर पर गांवों में किसी जंगली हाथी के घुसने की खबर भर से लोगों में हड़कंप मच जाता है और भगदड़ की स्थिति बन जाती है। 
 
लेकिन ओडिशा के संबलपुर जिले के जमनीकिरा ब्लॉक अंतर्गत सिरिड़ पंचायत में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। यहां एक जंगली दंतैल हाथी ग्रामीणों के लिए डर का नहीं, बल्कि असीम स्नेह का केंद्र बना हुआ है। 
 
लोग उसे प्यार से 'राजू' कहकर पुकारते हैं। करीब छह महीने पहले यह हाथी देवगढ़ जिले के बारकोट के घने जंगलों से भटककर इस क्षेत्र में आया था। 
 
आमतौर पर दंतैल हाथी आक्रामक और खतरनाक माने जाते हैं, लेकिन राजू का स्वभाव इसके बिल्कुल उलट है। उसके व्यवहार में जरा भी हिंसक तेवर नहीं हैं। 
 
वह बेहद शांति और सहजता के साथ ग्रामीणों के बीच विचरण करता है। आज राजू सिरिड़ और आसपास के गांवों में किसी अनजाने जंगली जानवर की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की भांति घूमता है। 
 
कभी वह गांव की संकरी गलियों में खड़ा दिखता है, तो कभी किसी के घर के दरवाजे पर। ग्रामीण भी उससे डरने के बजाय बड़े चाव से उसे केले, आम और अन्य फल खाने को देते हैं। 
 
इंसानों के इतने करीब होने के बावजूद राजू शांति से भोजन स्वीकार करता है और अपनी राह चला जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई उसके इस सौम्य स्वभाव का कायल है।
 
हालांकि, इस अनोखे लगाव और आत्मीयता के बीच वन विभाग ने सतर्कता बरतनी कम नहीं की है। वनकर्मी राजू की हर गतिविधि पर लगातार शिफ्टों में नजर रख रहे हैं, ताकि गांव वालों और हाथी दोनों की सुरक्षा बनी रहे। 
 
देश भर से सामने आने वाली मानव-हाथी संघर्ष की दुखद खबरों के बीच सिरिड़ गांव और राजू का यह आत्मीय रिश्ता यह साबित करता है कि संयम, प्रेम और समझदारी से कुदरत और इंसान के बीच एक खूबसूरत संतुलन बनाया जा सकता है।