ओडिशा में विदेशी टैग वाला कबूतर मिलने से हड़कंप, बांग्लादेश कनेक्शन की जांच में जुटी पुलिस
ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक कबूतर के पैर में 'BAN-2024' अंकित विदेशी पहचान टैग मिलने से हड़कंप मच गया है।

मयूरभंज में मिला विदेशी कबूतर। फोटो जागरण
HighLights
कबूतर के पैर में 'BAN-2024' अंकित विदेशी टैग मिला।
पुलिस बांग्लादेश कनेक्शन की आशंका पर गहन जांच में जुटी।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक कबूतर के पैर में विदेशी पहचान टैग मिलने के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है। बैसिंगा थाना क्षेत्र के काशीपड़ा गांव में मंगलवार को मिले इस कबूतर के पैर में लगी धातु की रिंग पर ‘बीएएन-2024’ और ‘701831’ अंकित मिला है।
टैग पर लिखे कोड को लेकर बांग्लादेश कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इन्कार करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
गांव वाले ने की पहचान
जानकारी के अनुसार, काशीपाड़ा गांव के एक निवासी की नजर एक कबूतर पर पड़ी, जिसके पैर में नीले रंग की धातु की रिंग लगी हुई थी।
रिंग पर अंग्रेजी में ‘बीएएन-2024’ और एक क्रम संख्या अंकित होने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। खबर मिलते ही बेतनटी एसडीपीओ और बैसिंगा थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा कबूतर और उसके पैर में लगे टैग की जांच की।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों ने रिंग पर अंकित कोड और संख्या का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि यह किसी कबूतर पालन या रेसिंग प्रतियोगिता में उपयोग होने वाला पहचान चिह्न हो सकता है।
वहीं, ‘BAN’ शब्द को लेकर कुछ लोग इसे बांग्लादेश से जोड़कर देख रहे हैं। इसी कारण पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। बड़ी संख्या में लोग कबूतर को देखने के लिए मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी रही कि कहीं पक्षियों के माध्यम से किसी प्रकार की गोपनीय गतिविधि तो नहीं संचालित की जा रही।
हालांकि अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि रिंग पर अंकित कोड के स्रोत और उसके पंजीकरण संबंधी जानकारी जुटाई जा रही है।
आवश्यकता पड़ने पर संबंधित एजेंसियों से भी संपर्क किया जाएगा। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कबूतर वास्तव में कहां से आया और उसके पैर में यह टैग किस उद्देश्य से लगाया गया था।
कबूतरबाजी की भी संभावना
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में विदेशी टैग लगे कबूतर मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अधिकांश मामलों में ऐसे पक्षी कबूतरबाजी, रेसिंग या प्रजनन कार्यक्रमों से जुड़े पाए गए हैं। फिर भी सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस हर पहलू की सावधानीपूर्वक जांच कर रही है।
फिलहाल मयूरभंज पुलिस पूरे मामले की पड़ताल में जुटी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कबूतर के वास्तविक स्रोत तथा टैग के रहस्य से पर्दा उठ सकेगा।
