भुवनेश्वर, जेएनएन। ओडिशा में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के खुदकशी करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। संबलपुर और बलांगीर जिला से दो किसानों के आत्महत्या करने का मामला फिर प्रकाश में आया है। संबलपुर जिले के मानेश्वर ब्लॉक अंतर्गत कुलिया गांव के किसान ललित मोहन बारिक ने मंगलवार को खुदकशी कर ली। परिवार के लोगों का आरोप है कि लगातार बारिश से फसल नुकसान के बाद से ललित मोहन काफी दवाब में थे। उन्होंने 17 लाख रुपये का ऋण लिया हुआ था।

इसी तरह बलांगीर जिले के कंटाबांजी क्षेत्र निवासी एक किसान ने बुधवार को आत्महत्या कर ली। कंटाबांजी के तुरेकेला ब्लॉक के कमेईमुंडा गांव के किसान की आत्महत्या के बाद लोगों ने जमकर बवाल काटा। उत्तेजित लोगों ने किसान के शव को रास्ते पर रखकर मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने की मांग की। इसे लेकर विपक्षी दल के सदस्यों ने भी विरोध-प्रदर्शन किया है। मृतक के परिवार का आरोप है कि ऋण के बोझ से दबे होने के कारण कीटनाशक पीकर आत्महत्या की है। पिछले कुछ दिनों से वह काफी परेशान थे। इधर, भाजपा ने इस मुद्दे पर कंटाबांजी-तुरेकेला सड़क पर पथावरोध किया। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रदेश में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।

सरकार किसानों की हितैषी होने का ढोंग कर रही है मगर वास्तविकता इसे बिल्कुल अलग है। आज भी किसान ऋण के बोझ तले दबा हुआ है और आत्महत्या करने को मजबूर है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग दर्जन भर किसान चकड़ा कीड़ा, सूखा के चलते फसल बर्बाद होने एवं कर्ज न चुका पाने के कारण खुदकशी कर चुके हैं।